Uttarakashi news: धराली को तबाह करने वाली जगह पहुंची SDRF, NIM की टीम, तस्वीरों ने किया चौंकाने वाले खुलासे
Uttarakashi dharali news:उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा से पूरा गांव तबाह हो गया साथ ही कई लापता हैं। जिसके लिए सर्च अभियान जारी है। धराली की आपदा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं, कि आखिर जिस तरह का मंजर कैमरों में कैद हुआ और प्रत्यक्षदर्शियों ने देखा, उसकी वजह क्या है।
वैज्ञानिक और एजेंसियां इन के कारणों का पता लगाने में भी जुट गई हैं। जिसमें एनडीआरएफ और एसडीआरएफ भी 13 दिन से जुटी हुई हैं। एसडीआरएफ, एनआईएम की संयुक्त टीम ने उस स्पॉट के कुछ विजुअल और जानकारी इकट्ठा किए। टीम ने खीर गंगा उद्गम स्थल तक उच्च स्तरीय रैकी एवं भौतिक निरीक्षण किया।

एसडीआरएफ से मिली जानकारी के अनुसार पहले पुलिस महानिरीक्षक, एसडीआरएफ के आदेश पर सबसे पहले 7 अगस्त 2025 को मुख्य आरक्षी राजेन्द्र नाथ के नेतृत्व में कांस्टेबल जसवेन्द्र सिंह, कांस्टेबल सोहन सिंह एवं कांस्टेबल गोपाल सिंह की टीम ने धराली गांव से पैदल मार्ग द्वारा खीर गंगा के दाहिने ओर लगभग 3450 मीटर ऊंचाई तक पहुंचकर ड्रोन संचालन किया। खीर गंगा की पूरी निगरानी की गई, एसडीआरएफ की ओर से जानकारी दी गई कि उस जगह पर किसी भी प्रकार की झील का निर्माण नहीं पाया गया है।
धराली क्षेत्र के ऊपर बने नालों की वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी की
जिसके वीडियो व फोटोग्राफी तत्काल उच्चाधिकारियों को उपलब्ध कराई गई। इसके बाद 08 अगस्त 2025 को एएसआई पंकज घिल्लियाल, मुख्य आरक्षी राजेन्द्र नाथ, मुख्य आरक्षी प्रदीप पंवार, कांस्टेबल सोहन सिंह तथा एफएम प्रवीण चौहान द्वारा श्रीकंठ पर्वत के नीचे लगभग 3900 मीटर ऊंचाई पर पुनः रैकी की गई। टीम ने ड्रोन से खीर गंगा एवं धराली क्षेत्र के ऊपर बने नालों की वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी की और संकलित सामग्री को वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान तथा यू-कॉस्ट के वैज्ञानिकों को भेजा है।
श्रीकंठ पर्वत बेस एवं खीर गंगा उद्गम स्थल का भौतिक निरीक्षण किया
14-15 अगस्त 2025 को मुख्य आरक्षी राजेन्द्र नाथ के नेतृत्व में मुख्य आरक्षी प्रदीप पंवार, कांस्टेबल सोहन सिंह, NIM उत्तरकाशी के प्रशिक्षक शिवराज पंवार एवं अनुप पंवार तथा पोटर तारा व हरि की संयुक्त टीम द्वारा श्रीकंठ पर्वत बेस एवं खीर गंगा उद्गम स्थल का भौतिक निरीक्षण किया गया।
श्रीकंठ पर्वत के आसपास कोई झील नहीं
टीम ने लगभग 4812 मीटर ऊँचाई तक पहुंचकर अत्यंत विषम परिस्थितियों घना कोहरा, तेज हवाएँ एवं वर्षा - के बीच भी ड्रोन (Phantom-4 एवं DJI Mini-2) के माध्यम से ग्लेशियर बेस और उद्गम स्थल की वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी की। जिसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी गई है। इसके बाद दावा किया गया है कि श्रीकंठ पर्वत के आसपास कोई झील नहीं बनी हुई है। हालांकि अब रिपोर्ट वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान तथा यू-कॉस्ट को भेजने के बाद इसके कारणेां की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जिसके बाद ही साफ हो पाएगा कि आखिर 5 अगस्त को धराली में हुआ क्या जिसने तबाही मचाई है।












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