उत्तराखंड भाजपा में 'निशंक' हुए जरुरी, सीनियर समेत कई भाजपाई से मुलाकात के तलाशे जा रहे सियासी मायने
निशंक की सक्रियता से भाजपा के अंदर नए समीकरणों को लेकर चर्चा
देहरादून, 7 मार्च। उत्तराखंड में भाजपा सरकार बनाने के लिए पूरी तरह से फोकस करने में जुटी है। इसके लिए सभी रणनीतिकारों को मैदान में उतार दिया है। इन सब के बीच पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की सक्रियता से भाजपा के अंदरखाने नए समीकरणों को लेकर चर्चा जारी है। पहले निशंक की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात उसके बाद देहरादून में निशंक से भाजपा के सीनियर नेताओं की मुलाकात के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। चुनाव परिणाम से ठीक पहले निशंक की राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और किशोर उपाध्याय से भी मुलाकात हुई है।

भाजपा के अहम रणनीतिकार हैं निशंक
प्रदेश की सियासत में रमेश पोखरियाल निशंक सबसे अग्रणी पंक्ति के नेताओं में शुमार हैं। 2007 में भाजपा सरकार बनने के बाद से निशंक पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकारों में शामिल रहे हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी के लिए विधानसभा की सीट खाली कराने से लेकर कांग्रेस खेमे में सेंधमारी मारने में भी निशंक ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद 2012 में नंबर कम आने के बाद भी निशंक ने सरकार बनाने की कोशिश की, हालांकि तब भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया। इसके बाद निशंक की केन्द्र की सियासत में एंट्री हुई। जिसके बाद निशंक को मोदी सरकार में शिक्षा मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी मिली। हालांकि बीच में स्वास्थ खराब होने के कारण लंबे समय से राजनीति से दूर भी रहे। विधानसभा चुनाव 2022 की घोषणा होने के बाद एक बार फिर निशंक की उत्तराखंड में सक्रियता बढ़ गई। हाईकमान ने निशंक को घोषणा पत्र बनाने की जिम्मेदारी सौंपी। अब चुनाव परिणाम से पहले निशंक की अचानक से सक्रियता बढ़ी है। जो कि भितरघात के आरोपों के बाद से ही ज्यादा नजर आ रही है। भितरघात के आरोपों के बाद से भाजपा के अंदर घमासान मचा हुआ है। पार्टी के 6 विधायक अब तक भितरघात के आरोप लगा चुकी है। जिसके बाद निशंक की दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात हो चुकी है। अब देहरादून पहुंचते ही निशंक के आवास पर नेताओं की दौड़ भी देखी जा रही है। राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के अलावा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए किशोर उपाध्याय भी निशंक से मुलाकात कर चुके हैं।
निशंक की सक्रियता से कांग्रेस में भी हलचल
इसके अलावा पिछले दिनों में भाजपा के संगठन से लेकर बड़े नेता निशंक से मुलाकात कर चुके हैं। जिससे भाजपा के अंदर एक नई तस्वीर निकलकर सामने आई है। चुनाव तक जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ही चेहरे बने हुए थे, चुनाव निपटते ही निशंक भी जरुरी हो गए हैं। जो कि भाजपा की सरकार बनाने के लिए अहम कड़ी माने जाते हैं। प्रदेश भाजपा नेतृत्व में अग्रणी पंक्ति में जो भी सीनियर नेता हैं, उनमें निशंक ही सबसे ज्यादा सक्रिय और बड़े कद के नेता है। जो कि परिणाम के बाद अहम भूमिका में आ सकते हैं। ऐसे में हाईकमान भी निशंक पर ज्यादा भरोसा कर सकते हैं। निशंक को लेकर हमेशा से ही कांग्रेस के अंदरखाने भी काफी सियासी हलचल देखी जा रही है। निशंक पूर्व सीएम हरीश रावत को हरिद्वार लोकसभा चुनाव में हरा चुके हैं। ऐसे में निशंक और हरीश रावत के बीच भी 10 मार्च के बाद सियासी जंग देखने को मिल रही है।












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