Uniform civil code उत्तराखंड में यूसीसी से बाहर रह सकती हैं सिर्फ ये जनजातीय समुदाय, खास है वजह
Uniform civil code उत्तराखंड की धामी सरकार विधानसभा सत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड को पेश करने जा रही है। इसके लिए ड्राफ्ट भी तैयार है, जिसे कैबिनेट मंजूर कर चुका है। अब सदन से पास करवाकर राजभवन को भेजा जाएगा। जिसके बाद उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जो कि यूसीसी लागू करेगा समान नागरिक संहिता से उत्तराखंड की जनजातियां अलग रह सकती हैं। प्रदेश में सात प्रमुख जनजातियां हैं, जिनके तौर तरीके और नियम अलग हैं।

यूसीसी के लिए बनाए गए ड्राफ्ट में उत्तराखंड की जनजातीय समुदायों को छोड़कर सभी को शामिल किया गया है। हालांकि अभी इस पर सरकार को अपना स्टैंड साफ करना होगा। यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने सबसे पहले उत्तराखंड की सीमावर्ती गांव माणा से ही अपनी बैठक की शुरूआत की।
जिससे इन जनजातीय समुदायों की संस्कृति को नजदीक से समझा जा सके। अपनी बैठकों का सिलसिला प्रदेश की सीमा पर स्थित देश के पहले गांव माणा से किया। समिति के सदस्यों ने आदिवासी समाज की स्थिति समस्याएं जानने के साथ ही समान नागरिक संहिता के दृष्टिगत सुझाव लिए थे। जिसमें इन लोगों से बातचीत कर परेशानियों को समझा गया।
उत्तराखंड में पांच जनजातियां अधिसूचित हैं। इनकी जनसंख्या 2,91,903 है। बताया जा रहा है कि यूसीसी ड्राफ्ट कमिटी ने अपनी विशिष्ट पहचान, पिछड़ेपन और विभिन्न कारणों से घटती जनसंख्या को देखते हुए राज्य की जनजातियों को समान नागरिक संहिता से बाहर रखने की सिफारिश की है। उत्तराखंड में बोक्सा, राजी, थारू, भोटिया और जौनसारी जातियों को 1967 में जनजाति घोषित किया गया था।
प्रदेश में बोक्सा और राजी जनजाति तो अन्य जनजातियों के मुकाबले अधिक पिछड़ी हैं। देश में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की दशा सुधारने के लिए केंद्र की ओर से शुरू किए गए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम- जनमन) में उत्तराखंड की बोक्सा और राजी जनजातियों को लिया गया है।
इनके राज्य में 211 गांव हैं। थारू जनजाति उत्तराखंड व कुमाऊं का सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय है। इसके बाद जौनसारी राज्य की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है। वहीं, भोटिया जनजाति प्रदेश की सबसे प्राचीन मानी जाती है।












Click it and Unblock the Notifications