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हरित दून में तीन प्रोजेक्ट के जरिए हजारों पेड़ों की दी जाएगी बलि, जानिए क्यों ?

देहरादून में हाईवे तैयार करने को हजारों पेड़ काटे जाएंगे

देहरादून, 7 मई। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सड़कों के चौड़ीकरण और हाईवे को तैयार करने के लिए हजारों पेड़ों की बलि दी जा रही है। जिसके लिए तीन प्रोजेक्ट एक साथ काम करने जा रहे हैं। ​एक प्रोजेक्ट पर काम चल रही है, जबकि दो प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू करने की तैयारी है। रिंग रोड के चौड़ीकरण के काम के लिए 2,200 पेड़ों को काटे जाने की तैयारी चल रही है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण में भी 11 हजार पेड़ों की बलि चढ़ेगी। साथ ही हिमाचल प्रदेश को देहरादून से जोड़ने वाली हाईवे के​ लिए साढ़े 5 हजार पेड़ काटे जाने की तैयारी है। ऐसे में हरित दून के लिए आने वाले समय में पर्यावरण की दृष्टि से कई तरह की समस्याएं सामने आ सकती है। जिसको लेकर समाजसेवी अभी से चिंता जताने लगे हैं।

 Thousands of trees will be sacrificed through three projects in Green Doon, know why?

देहरादून में रिंग रोड के चौड़ीकरण का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद
देहरादून में रिंग रोड के चौड़ीकरण का काम जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए 2,200 पेड़ों को काटे जाने की तैयारी चल रही है। साथ ही, 400 पेड़ों का ट्रांसप्लांट किया जाना है। जोगीवाला से रिंग रोड-लाडपुर, सहस्रधारा क्रॉसिंग से कुल्हान तक 14 किमी लंबी सड़क के चौड़ीकरण की मंजूरी एक साल पहले मिल गई थी। इसके लिए सेंट्रल रोड फंड यानी सीआरएफ से 77 करोड़ रुपये दिए गए थे। इस पूरी सड़क को फोरलेन बनाया जाना है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया था। कुछ पेड़ इसकी जद में आ रहे हैं। इनको काटने की अनुमति लेने में कुछ समय लगा है। अब इसकी अनुमति भी मिल गई है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण में भी 11 हजार पेड़ों की बलि चढ़ेगी। जिस पर काम तेजी से चल भी रहा है। जिसका लंबे समय से विरोध हो रहा है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश को देहरादून से जोड़ने वाली हाईवे की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही है। जिसका फेस-1 का काम लगभग पूरा हो चुका है। लेकिन इस परियोजना में धर्मावाला क्षेत्र से साढ़े 5 हजार से अधिक पेड़ विकास की बलि चढ़ जाएंगे।
भू माफिया को फायदा पहुंचाने का आरोप
इसको लेकर एक बार फिर देहरादून के पर्यावरण प्रेमी और कई संगठन विरोध में उतर आए हैं। सिटीजन्स फॉर ग्रीन दून के संस्थापक हिमांशु अरोड़ा का कहना है कि जोगीवाला से लेकर सहस्त्रधारा तक जो हाईवे बन रहा है। उसका पर्यटकों को कोई लाभ मिलने जा रहा है। ये सिर्फ भू माफिया को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। देहरादून को कंक्रीट का जंगल बनाया जा रहा है। देहरादून को भी एनसीआर की तरह ऐसे शहर बनाया जा रहा है जिसमें अब हरा भरा कुछ भी नहीं रहेगा। पर्यटक देहरादून हरित दून को देखने आते हैं। लेकिन सरकार इस तरह से हर तरफ पेड़ों के कटान को करने की मंजूरी दे रही है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश को जाने वाली हाईवे के लिए भी किया जा रहा है। जिसका कोई औचित्य नजर नहीं आता है। राज्य सरकार किस तरह के विकास की ओर उत्तराखंड को ले जा रही है। ये समझ से परे है।

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