मिशन 60 प्लस के लिए उत्तराखंड में ये है भाजपा की कमजोर कड़ी, साढ़े 4 साल में हाशिए पर रहे दायित्वधारी
मिशन 60 प्लस के लिए उत्तराखंड में दायित्वधारी हैं भाजपा की कमजोर कड़ी
देहरादून, 12 नवम्बर। उत्तराखंड में चुनाव आते ही भाजपा अब अपने कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देने में जुट गई है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है। जिसकी जिम्मेदारी चुनाव प्रभारी और प्रदेश स्तर के बड़े नेता संभाले हुए हैं। लेकिन चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी भाजपा को झेलनी पड़ रही है। इसका कारण है दायित्वधारियों की नियुक्ति न होना। खुद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी इस बात को स्वीकारता है। कि दायित्वधारियों की बात को सुनने में चूक हुई है। अब चुनाव रहते इस चूक को पार्टी भूलकर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश करने में जुटी है। हालांकि कार्यकर्ताओं की नाराजगी चुनाव से पहले दूर होगी ऐसा नजर नहीं आता। ऐसे में पार्टी को इसका नुकसान भी भुगतना पड़ सकता है।

सीएम बदले तो दायित्व भी बदले
सरकार आने पर राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को विभिन्न निगमों, परिषद और समितियों में दायित्व देकर उन्हें खुश करने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस बार पूर्ण बहुमत की सरकार आने के बाद भी भाजपा ने साढ़े 4 साल में दायित्वधारियों को नजर अंदाज किया। कार्यकर्ताओं को दायित्व बांटे भी तो कम समय के लिए। सीएम के 3 चेहरे बदले गए, कैबिनेट मंत्रियों को रिपीट किया गया, लेकिन दायित्वधारियों को दोबारा जिम्मेदारी नहीं मिली। जिसकी नाराजगी अब चुनाव से पहले भाजपा को झेलनी पड़ रही है।
तीरथ ने बदले, धामी ने भी नहीं ली सुध
बीते 2 अप्रैल को सीएम बनने के बाद तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड में भाजपा के ही पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के तकरीबन चार साल के कार्यकाल में नामित करीब 120 दायित्वधारियों और महानुभावों की छुट्टी कर दी थी। त्रिवेंद्र सरकार ने विभिन्न आयोगों, निगमों परिषदों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सलाहकार व अन्य पदों पर गैर सरकारी महानुभावों को नामित किया था। इनमें से करीब 80 महानुभावों को मंत्री, राज्यमंत्री स्तर या अन्य महानुभाव स्तर का दर्जा दिया गया था। इसके अतिरिक्त करीब 40 ऐसे दायित्वधारी भी नियुक्त किए गए थे, जिन्हें किसी तरह का दर्जा नहीं दिया गया। तीरथ सिंह रावत सरकार ने करीब 20 दिन बाद ही सभी महानुभावों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया। तब दावा किया गया कि पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत नए सिरे से दायित्वधारियों की नियुक्ति करेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।विभिन्न आयोगों और निगमों में नियुक्त किए गए अधिकांश लोग त्रिवेंद्र रावत के चहेते लोगों में शामिल थे। जिनको बाहर का रास्ता दिखाया गया।
8 माह तक लटका मामला
तीरथ सिंह रावत अपने कार्यकाल में दायित्वधारियों को दोबारा नियुक्त नहीं कर पाए। इसके बाद पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन कैबिनेट में मामूली फेरबदल करने के अलावा कोई नई जिम्मेदारी नहीं बांटी गई। इस तरह से 8 माह से अधिक समय में दायित्वधारियों का मुद्दा भाजपा ने गंभीरता से नहीं लिया। जिससे अब चुनाव आते ही भाजपा के लिए ऐसे कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी है। अब चुनाव नजदीक है तो दायित्वों को बांटने का समय भी नहीं रह गया है। ऐसे में इस मामले में भाजपा डेमेज कंट्रोल नहीं कर सकती है। जिसका नुकसान चुनाव में भी हो सकता है।
चुनाव प्रभारी कर रहे संवाद स्थापित
उत्तराखंड में चुनाव प्रभारियों को हाईकमान ने ऐसे सभी मुद्दों पर बातचीत और संवाद स्थापित करने के लिए भेजा है, जिससे कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के साथ ही चुनाव प्रबंधन को मजबूत करने के लिए मंथन चल रहा है। चुनाव प्रभारी प्रह्रलाद जोशी ने पूर्व विधायकों, पूर्व दायित्वधारियों और पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से संवाद किया है। जो कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के साथ ही नया जोश भरने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रह्रलाद जोशी ने जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है । जनप्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच सेतु का कार्य करता है और जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति पूर्ण निष्ठा पारदर्शिता के साथ कार्य कर अपने कर्तब्यों का निर्वहन करने से आम जनता का भी उनके प्रति विश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा कि यह कार्य हमारे सभी जनप्रतिनिधि बखूबी कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष भाजपा मदन कौशिक ने कहा कि 2017 की जनप्रतिनिधि बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे जिनका उपयोग चुनावी वर्ष में हुआ था। अब 2022 में होने वाले चुनाव में हम सबको बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी करनी है, ऐसे में हम सब जनप्रतिनिधियों को घर-घर जाकर जनता से जुड़े कार्यक्रमों में जनता को जोड़ने का कार्य करना है। सभी जनप्रतिनिधि 2022 में 'अबकी बार 60 पार' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आगे बढ़ें, यह हमारे लिए महत्वपूर्ण होगा। अपने-अपने क्षेत्रों में विजय प्राप्त करने के लिए समाज को जागरूक करने का काम करना है।












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