उत्तराखंड कांग्रेस में हार पर दो दिन तक होगा मंथन, खुलकर हो रही जुबानी जंग का दिखेगा असर
21 और 22 मार्च को वरिष्ठ नेता अविनाश पांडेय करेंगे समीक्षा
देहरादून, 21 मार्च। उत्तराखंड में करारी हार के बाद कांग्रेस अब दो दिन हार की समीक्षा कर मंथन करने जा रही है। 21 और 22 मार्च को हाईकमान की ओर से भेजे गए वरिष्ठ नेता अविनाश पांडेय की मौजूदगी में प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव के साथ ही पार्टी के सभी सीनियर नेता मौजूद रहेंगे। इस दौरान हरीश रावत खेमा और प्रीतम खेमा एक बार फिर आमने-सामने होने वाले हैं।

प्रदेश अध्यक्ष पहले ही दे चुके हैं इस्तीफा
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के इस्तीफे के बाद प्रदेश कांग्रेस के अंदर एक बार फिर सियासी तूफान आया हुआ है। ऐसे में हार के कारणों का पता लगाने में जुटी कांग्रेस के लिए किसी की जिम्मेदारी तय करनी आसान नहीं है। कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद से ही जमकर बवाल मचा हुआ है। पूर्व सीएम हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष रहे प्रीतम सिंह के बीच वार-पलटवार भी जारी है। प्रीतम सिंह के बयान फसल बोए कोई, काटे कोई के बाद हरीश रावत ने चुनाव में अपनी हार की जिम्मेदारी ले ली। हालांकि उन्होंने कई तरह के सवाल खड़े किए जिसमें हरीश रावत को लालकुंआ से लड़ाने के फैसले को लेकर वे हाईकमान पर सवाल खड़े कर चुके हैं। इसके बाद कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत ने हरीश रावत पर पैसे देकर टिकट बेचने का आरोप भी लगाया था। जिस पर हरीश रावत ने पार्टी से उन्हें खुद को बर्खास्त करने की मांग की थी। इस तरह से कांग्रेस के अंदर जमकर आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। जिससे कांग्रेस के अंदरखाने परिवर्तन की मांग भी तेजी से उठने लगी है।
समीक्षा से पहले ही जमकर हो रही जुबानी जंग
हाईकमान ने पहले प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का इस्तीफा मांगा, उसके बाद सीनियर नेता अविनाश पांडेय को हार की समीक्षा के लिए देहरादून भेजा है। गणेश गोदियाल के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के सीनियर नेता गोविंद सिंह कुंजवाल ने संगठन पर अपने हिसाब से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गणेश गोदियाल के अध्यक्ष बनने के बाद भी संगठन के लोग अपने हिसाब से ही काम करते रहे। जिस कारण पार्टी की हार हुई है। कुंजवाल ने अब मजबूत संगठन के गठन की मांग की है। सीनियर नेताओं के आपसी मतभेद के बीच कांग्रेस की समीक्षा बैठक में हंगामा होना तय है। जिसमें दोनों गुट एक दूसरे पर ही हार का ठीकरा फोड़ सकते हैं। हरीश रावत जिस तरह के तेवर दिखा रहे हैं, उससे साफ है कि वे अभी हार नहीं मानने वाले हैं। हरीश रावत मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रकरण को लेकर पहले ही हमलावर हैं। जिसका असर कांग्रेस के अंदर के संगठन पर भी दिखना तय है। पार्टी खुद अभी तय नहीं कर पा रही है कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रकरण को पार्टी के अंदर किसने उठाया। साथ ही संगठन में किसने पदाधिकारी नियुक्त किया।
दो पदों के लिए भी खींचतान शुरू
इस बीच प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को लेकर लॉबिंग शुरू हो गई है। जिसका असर भी आने वाले दिनों में कांग्रेस के अंदर दिखना तय है। दो पद के लिए दर्जनों दावेदार तैयार हैं। हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य की कांग्रेस में क्या भूमिका होनी है ये भी इस बैठक के बाद तय हो सकता है। लेकिन पार्टी हार के लिए पहले ही जब प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा ले चुकी है, तो अब किसका नंबर आएगा, ये देखना भी दिलचस्प होगा।












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