सीएम धामी के लिए आसान नहीं होगा चंपावत का रण, जानिए वो दो फैक्टर जिस पर सीएम को रहना होगा सचेत
चंपावत से उपचुनाव लड़ेंगे सीएम पुष्कर सिंह धामी
देहरादून, 21 अप्रैल। चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी के इस्तीफे के बाद ये तो तय हो गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चंपावत से ही चुनाव लड़ने जा रहे हैं। लेकिन अब ये भी सवाल उठने लगा है कि क्या चंपावत सीएम के लिए सबसे सुरक्षित सीट है। इसके पीछे 2 सवाल अहम है। पहला चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी का चुनाव बाद भितरघात का आरोप लगाना और दूसरा इस सीट पर कांग्रेस भी दो बार चुनाव जीत चुकी है। उपचुनाव में भी पुष्कर सिंह धामी का मुकाबला दो बार के विधायक हेमेश खर्कवाल से तय माना जा रहा है। ऐसे में चंपावत की राह सीएम धामी के लिए इतनी आसान है नहीं जितनी नजर आ रही है। चम्पावत सीट में मतदाताओं की संख्या 95,948 है। इनमें पुरूष मतदाताओं की संख्या 50,016 जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 45,932 है।

विधायक कैलाश गहतोड़ी ने लगाया था भितरघात का आरोप
गुरूवार को लंबे समय से चल रहा सस्पेंश कैलाश गहतोड़ी के इस्तीफे के बाद खत्म हो गया। जिससे साफ है कि अब सीएम धामी चंपावत के रण में कूदने जा रहे हैंं। लेकिन इस बीच सीएम के शुभचिंतक एक सवाल उठा रहे हेैं कि चुनाव बाद जिस तरह विधायक कैलाश गहतोड़ी ने भितरघात का आरोप लगाया था। उससे सीएम को सजग होना होगा। दूसरा खेमा चंपावत में भी सीएम के खिलाफ एक्टिव हो सकता है। 2022 में चम्पावत में कुल 50.26 प्रतिशत वोट पड़े। भारतीय जनता पार्टी से कैलाश गहतोड़ी ने इंडियन नेशनल कांग्रेस के हेमेश खार्कवाल को 5304 वोटों के मार्जिन से हराया था।

दो बार कांग्रेस जीत चुकी है सीट
यहां हर चुनाव में भाजपा व कांग्रेस ही मुख्य मुकाबले में रहे हैं। लेकिन वर्ष 2012 में बसपा के मदन महर ने मतदाताओं में जबर्दस्त सेंधमारी कर दूसरा स्थान प्राप्त किया था। वर्ष 2017 के चुनाव में कैलाश गहतोड़ी ने सीधे मुकाबले में हेमेश खर्कवाल को रिकॉर्ड 17,360 मतों से हराया था। कैलाश गहतोड़ी को 36,601 वोट तथा हेमेश को 19,241 वोट मिले थे। उत्तराखंड बनने के बाद चम्पावत विधानसभा सीट पर वर्ष 2002 से 2017 तक भाजपा ने कभी भी किसी प्रत्याशी को दोबारा टिकट नहीं दिया। कांग्रेस ने इस सीट पर लगातार हेमेश खर्कवाल को टिकट दिया है। पहले चुनाव 2002 में कांग्रेस के हेमेश खर्कवाल यहां से विधायक चुनकर आए। वर्ष 2007 में बीना महराना विधायक बनीं। वर्ष 2012 में उनका टिकट काट कर तत्कालीन जिलाध्यक्ष हेमा जोशी को प्रत्याशी बना दिया। लेकिन तब यहां भाजपा तीसरे स्थान पर खिसक गई। इस चुनाव में कांग्रेस के हेमेश खर्कवाल 20,310 मतों से विजयी रहे थे। बसपा से चुनाव लड़ रहे मदन सिंह महर 13,317 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। भाजपा की हेमा जोशी को 8,690 वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। इस तरह चंपावत के समीकरण पूरी तरह भाजपा के पक्ष में नहीं रहे हैं।

सीएम की पहली पसंद रही चंपावत सीट
सीएम धामी की सीएम बनने के बाद पहली पसंद भी चंपावत मानी जा रही थी। सीएम बनने के बाद धामी ने पहला दौरा यहीं किया। जिसके बाद लोगों के फीडबैक और खटीमा से नजदीक होने की वजह से सीएम ये सीट सुरक्षित मान कर चल रहे हैं। हाईकमान ने भी सीएम के लिए सबसे सुरक्षित सीट का चयन कर चंपावत को ही फाइनल किया है। चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने भी सबसे पहले सीएम के लिए सीट छोड़ने की पेशकश की थी। सीएम बनने के बाद सबसे पहले धामी चंपावत पहुंचे थे। पहले कार्यकाल में भी सीएम के रूप में छह माह की पहली पारी में उन्होंने बनबसा-टनकपुर, चंपावत, अमोड़ी, देवीधुरा, नाखुड़ा का दौरा किया। 23 मार्च को सीएम पद की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री बनबसा, टनकपुर, पूर्णागिरि धाम का दौरा कर चुके हैं। इतना ही नहीं इस दौरान सीएम ने चाय की दुकान पर भी लोगों के मन की बात को टटोलने की कोशिश की। जिसके बाद सीएम ने हाईकमान को अपने मन की बात भी बताई। सीएम धामी ने चंपावत पहुंचकर अपना चंपावत से खास रिश्ते का भी जिक्र किया। चंपावत सीएम के खटीमा क्षेत्र से 10 से 12 किमी की दूरी पर है। जिसका अधिकतर क्षेत्र टनकपुर-बनबसा में ही बसा हुआ है। इस सीट पर पूर्व सैनिक और नेपाल बॉर्डर के लोग ज्यादा हैं। जिस वजह से सीएम के लिए ये सबसे सुरक्षित मानी जा रही है। साथ ही यहां दो बार से भाजपा का ही विधायक चुनकर आया है। अब सितंबर से पहले उपचुनाव जीतकर सीएम को विधानसभा आना होगा।
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