Uttarakhand कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बयान के सियासी मायने, जानिए क्या हैं टिहरी सीट के समीकरण

टिहरी लोकसभा सीट से सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह को लेकर जनता की नाराजगी और अब नरेंद्रनगर से भाजपा विधायक धामी सरकार में मंत्री सुबोध उनियाल को लेकर सोशल मीडिया में एक नई बहस छिड़ी हुई है।

लोकसभा चुनाव भले ही 2024 मे होने हैं, लेकिन उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव को लेकर बीते कुछ समय से कई तरह के सियासी समीकरण बनते हुए नजर आ रहे हैं। इस बीच टिहरी लोकसभा सीट को लेकर सबसे ज्यादा सियासी हलचल देखी जा रही है। पहले टिहरी से सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह को लेकर जनता की नाराजगी और अब नरेंद्रनगर से भाजपा विधायक धामी सरकार में मंत्री सुबोध उनियाल को लेकर सोशल मीडिया में टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा। इन सभी मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया में एक नई बहस छिड़ी हुई है।

Recommended Video

    Uttarakhand कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बयान के सियासी मायने, जानिए क्या हैं टिहरी सीट के समीकरण
    tehri Lok Sabha seat political stir cabinet minister subodh uniyal mala rajya laxmi shah mp

    जनता का काम नहीं कर पाए तो अगली बार चुनाव नहीं लड़ेेंगे

    इन सभी मुद्दों पर सुबोध उनियाल ने सफाई भी दी है। उन्होंने साफ किया कि वे पार्टी के सच्चे सिपाही है। न हीं उन्होंने लोकसभा चुनाव को लेकर किसी तरह का बयान दिया है। सुबोध उनियाल ने साफ किया कि उन्होंने जनता की नाराजगी को लेकर साफ किया था कि अगर वे भी जनता का काम नहीं कर पाए तो अगली बार चुनाव नहीं लड़ेेंगे। सुबोध उनियाल के इस बयान को लेकर कई तरह के सियासी मायने तलाशे जाने लगे। सोशल मीडिया में ये तक दावा किया गया कि सुबोध उनियाल टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। जिसके बाद सुबोध ने मीडिया में स्थिति स्पष्ट की है।

    टिहरी से भाजपा के अंदर ही कई दावेदार नजर आ रहे

    टिहरी लोकसभा सीट पर भाजपा की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह के जनता से सीधा संवाद न होने और अक्सर क्षेत्र में न रहने का आरोप लगता रहा है। ऐसे में इस बार टिहरी से भाजपा के अंदर ही कई दावेदार नजर आ रहे हैं। इसमें एक नाम सुबोध उनियाल का भी जुड़ गया है। सुबोध उनियाल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं। जो कि धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री है। सुबोध उनियाल 2007 को छोड़कर 4 बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं। जबकि दूसरी बार वे कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं। इससे पहले वे भाजपा सरकार में शासकीय प्रवक्ता की अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं। सुबोध जिस नरेंद्रनगर सीट से विधायक हैं, उस सीट का काफी क्षेत्र टिहरी लोकसभा सीट में ही आता है। इसी वजह से उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। हालांकि सुबोध खुद इस बात से इनकार कर रहे हैं।

    2 बार छोड़कर भाजपा के टिकट पर शाह परिवार का दबदबा
    तीन दशकों से टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट पर राजसी परिवार का दबदबा रहा है। केवल 2007 उपचुनाव व 2009 चुनाव को छोड़कर इस क्षेत्र से शाही परिवार के सदस्य भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर संसद पहुंचते रहे हैं । टिहरी रियासत पर 1803 से 1948 तक पंवार राजपूत वंश का शासन रहा है। वर्ष 1991 से पहले टिहरी राजघराने के सदस्य कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतते रहे । सांसद माला राज्यलक्ष्मी इस सीट पर लगातार 3 बार जीत चुकी हैं। शाह के ससुर महाराजा मानवेंद्र शाह टिहरी सीट से आठ बार निर्वाचित हुए थे । 1957 से लेकर 2004 तक शाह ने तीन बार कांग्रेस और पांच बार भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की। 2007 में मानवेंद्र शाह की मृत्यु के बाद सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनके पुत्र महाराजा मनुजेंद्र शाह पर दांव खेला । उन्हें तत्कालीन कांग्रेस नेता विजय बहुगुणा के हाथों पराजय का सामना करना पडा और इसके साथ ही यह सीट भी टिहरी राजपरिवार के हाथ से निकल गयी।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+