उत्तराखंड में कहीं BJP को ले ना डूबे चारधाम यात्रा का मुद्दा? कांग्रेस और AAP ने की तगड़ी घेराबंदी
देवस्थानम बोर्ड और चारधाम यात्रा को लेकर हो रहा चौतरफा विरोध
देहरादून, 9 सितंबर। उत्तराखंड में हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक चारधाम यात्रा चुनावी साल में बीजेपी के लिए मुश्किलेंं कर रहा है। पहले से ही देवस्थानम बोर्ड को लेकर चारधाम यात्रा से जुड़े स्थानीय लोग और पुरोहितों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। अब चारधाम यात्रा को शुरू करवाने के लिए तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने सरकार के खिलाफ हल्ला बोल कर दिया है। इतना ही नहीं विपक्षी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी चारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार को घेरने में जुटी है।

2 साल से बंद पड़ी है यात्रा
कोविड के चलते 2 साल से उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा बंद पड़ी हुई है। इससे स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों की आजीविका बर्बाद हो गई है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद जब स्थिति सामान्य हुई है तब भी चारधाम यात्रा शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में स्थानीय लोगों को विरोध अब राज्य सरकार को झेलना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने जब चारधाम यात्रा का संचालन करने की तैयारी की थी तो हाईकोर्ट ने यात्रा पर रोक लगा दी। उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हैं। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी विशेष अनुमति याचिका भी दी। लेकिन अब स्थानीय लोगों के आंदोलन तेज होने के बाद राज्य सरकार पर भारी दबाव है। राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेकर हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी करने की बात कर रही है।
तीर्थ पुरोहितों का आंदोलन तेज, कांग्रेस और आप भी कूदी
राज्य सरकार के इस फैसले के बाद भी तीर्थ पुरोहितों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। चारधाम महापंचायत ने आगे की रण्नीति भी तैयार कर दी है। इससे राज्य सरकार पर चौतरफा दबाव बन गया है। इधर चुनावी साल है तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने चारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। कांग्रेस की और से पूर्व सीएम हरीश रावत ने बीजेपी सरकार को जमकर निशाने पर लिया है। हरीश रावत का कहना है कि प्रदेश में सब कुछ खुला है, लेकिन चारधाम यात्रा बंद है। आम आदमी पार्टी भी स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आंदोलन को सफल बनाने में लगी है।
पूर्व सीएम हरीश रावत ने फेसबुक पेज पर लिखा है कि-
उत्तराखंड में सब कुछ खुला हुआ है, रैलिया भी खुली हैं, यात्राएं भी खुली हैं, सत्तारूढ़ दल की पब्लिक मीटिंग्स भी खुली हुई हैं, मगर यदि बंद है केवल चारधाम यात्रा है। कुंभ में कुछ ऐसा कुकर्म हुआ कि उसकी आंच चारधाम यात्रा पर भी पड़ गई है। लोग जो चारधाम यात्रा पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर थे वो आत्महत्या करने के कगार पर आ गये हैं। सरकार, हाईकोर्ट के सम्मुख अपना पक्ष रखने को तैयार नहीं है। हमने 2014 में बहुत नियंत्रित चारधाम यात्रा चलाई थी, विशेष तौर पर केदारनाथ की। कुछ अतीत से सबक लेकर धामी जी आगे बढ़िये।
चारधाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत के मीडिया प्रभारी नरेश आनंद नौटियाल ने कहा कि
सरकार ने लंबे समय तक जानबूझकर चारधाम यात्रा का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी डालकर लटकाया है। लेकिन जिस तरह से स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा सरकार के खिलाफ है। उसके बाद सरकार अब हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी करने की बात कर रही है। हमारा आंदोलन उग्र होने जा रहा है। हम 13 को रुद्रप्रयाग मुख्यालय और 16 को सीएम आवास घेराव की रणनीति बना रहे हैं।












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