Uttarakhand: बहुचर्चित शक्तिमान प्रकरण एक बार फिर चर्चा में, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर है आरोप
शक्तिमान घोड़े की मौत के मामले में आरोपी रहे कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को निचली अदालत से दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

उत्तराखंड का बहुचर्चित शक्तिमान प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। शक्तिमान घोड़े की मौत के मामले में आरोपी रहे कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को निचली अदालत से दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 21 दिसंबर की तारीख नियत की है।
सजा दिलाए जाने की मांग हाईकोर्ट से की
गौरतलब है कि होशियार सिंह बिष्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि 2016 में विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस की लाठी से भाजपा नेता व वर्तमान में वर्तमान में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने घोड़े की टांग पर हमला किया और बाद में उस घोड़े की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने 23 अप्रैल 2016 को गणेश जोशी को इस मामले में आरोपी बनाया जिसका देहरादून के नेहरू कालोनी थाने में मुकदमा भी दर्ज किया। 16 मई 2016 को चार्जशीट दाखिल की गई। बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार ने सीजेएम कोर्ट से केस वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया। 23 सितंबर 2021 को निचली अदालत ने गणेश जोशी को बरी कर दिया। अपीलीय कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना। याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के निर्णय को निरस्त करने के साथ गणेश जोशी व अन्य को सजा दिलाए जाने की मांग हाईकोर्ट से की है।
ये है मामला
साल 2016 में विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस की लाठी से विधायक गणेश जोशी ने घोड़े की टांग पर हमला किया और बाद में घोड़े की मौत हो गई थी। इस मामले में 23 अप्रैल 2016 को पुलिस ने गणेश जोशी को आरोपी बनाया और देहरादून के नेहरू क्लोनी थाने में मुकदमा भी दर्ज किया गया था। इसके बाद 16 मई 2016 को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। बाद में सरकार ने सीजेएम कोर्ट के केस वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया।












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