रेस्क्यू ऑपरेशन में रैट-होल माईनर्स बने हीरो, श्रमिकों ने देखते ही लगाया गले, खाने को दिया बादाम
उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने में रैट-होल माइनर्स हीरो की तरह सामने आए। इन लोगों ने खुद हाथों से सुरंग के भीतर ड्रिलिंग करके श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम किया।
इन माईनर्स के लिए यह काम काफी मुश्किलभरा था और बहुत ही ज्यादा थकाने वाला, लेकिन जब सभी 41 श्रमिक बाहर मुस्कुराते हुए बाहर आए तो इन्हें देखकर इन माईनर्स की सारी थकावट दूर हो गई।

सुरंग के भीतर हाथ से खुदाई कर रहे देवेंद्र ने कहा कि श्रमिक हमे देखकर बहुत ही ज्यादा खुश थे, उन लोगों ने हमे गले लगाया और हमे बादाम खाने को दिए। हमने 15 मीटर तक हाथ से सुरंग में कटिंग की। हम जब आखिरी मुहाने पर पहुंचे और श्रमिकों की झलक दिखी तो हम बहुत ही खुश थे।
बचावकर्मियों ने कहा कि रैट होल माइनिंग प्रतिबंधित प्रक्रिया है। जब हाईटेक इंपोर्टेड मशीन टूटी तो आखिरी चरण की खुदाई का काम हमने हाथ से शुरू किया। इसके बाद हाथ से खुदाई करके श्रमिकों को बाहर लाने का काम किया।
श्रमिकों के टीम लीडर ने कहा कि श्रमिकों ने बहुत ही अच्छा काम किया, हम इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि हमे हर हाल में अंदर फंसे श्रमिकों को बाहर निकालना है। यह जीवन में कभी-कभार आने वाला अवसर था। बचावकर्मियों ने लगातार 24 घंटे काम किया
खुद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रैट होल माईनर्स का शुक्रिया अदा किया। रैट-होल माईनर्स के टीम लीडर ने कहा कि मैं खुद अंदर फंसे श्रमिकों से मिला। उन्होंने कहा कि सुरंग के भीतर उन्हें किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई।
गौर करने वाली बात है कि मंगलवार की शाम को सभी श्रमिक बाहर आ गए। 17 दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे रहने के बाद ये श्रमिक बाहर आए हैं। ये श्रमिक 12 नवंबर को सुरंग के भीतर फंसे थे।
जिस तरह से भारी-भरकम ड्रिलिंग करने वाली ऑगर मशीन दो दिन पहले खराब हो गई, उसके बाद रैट-होल माईनर्स ने इसका जिम्मा संभाला और हाथ से बची हुई जगह की खुदाई शुरू की और सफलतापूर्वक श्रमिकों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।












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