मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की आज पुण्यतिथि है। इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों को साझा करते हुए लिखा जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं,वह हृदय नहीं है पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं !"
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी साहित्य जगत को आलोकित करने वाले "पद्म भूषण" से सम्मानित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन। विनम्र श्रद्धांजलि !

बता दें कि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 को हुआ था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी लेखनी के जरिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, यही वजह है कि उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि दी गई। उनकी पुस्तक भारत-भारती के चलते मैथिलीशरण गुप्त को पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। खड़ी बोली के महान कवियों के तौर पर उन्हें जाता है।
प्रारंभिक जीवन की बात करें तो मैथिलीशरण गुप्त का जन्म झांसी के चिरगांव में हुआ था। गुप्त को स्कूल जाना पसंद नहीं था, उन्हें संस्कृत भाषा अच्छी नहीं लगती थी, जिसकी वजह से उनकी शुरुआती शिक्षा की व्यवस्था उनके पिता ने घर पर ही की थी। उनके पिता का नाम रामचरण गुप्ता था, जबकि मां का नाम काशीबाई था।
वर्ष 1990 में गुप्त का पहले प्रमुख काम रंग में भंग इंडियन प्रेस में प्रकाशित हुआ था, भारत भारती के साथ उनकी राष्ट्रवादी कविताएं काफी लोकप्रिय हुई थी। गुप्त की अधिकांश कविताएं रामायण, महाभारत के कथानक के ईर्द-गिर्द घूमती थी। उनकी कविता प्राण न पागल हो तुम यों, धरती पर वह प्यार कहाँ..मोहमयी छलना भर है, भटको ना अहो अब और यहां..ऊपर को निरखो अब तो बस यही दिखता है चिरमेल वहाँ, काफी लोकप्रिय हुई थी।
वर्ष 1947 में देश को जब आजादी मिली तो उसके बाद गुप्त को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। यहां उन्होंने अपनी राय को खुलकर कविता के माध्यम से रखा. वह 1964 त राज्यसभा के सदस्य रहे, उन्हें 1954 को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।












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