PM Narendra modi visit माणा गांव, देश का आखिरी गांव, खास है यहां के पौराणिक रहस्य
पीएम मोदी बद्रीनाथ से माणा गांव के लोगों संबोधित करेंगे
PM Narendra modi visit प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अक्टूबर को केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए आ रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी 21 अक्टूबर को बद्रीनाथ धाम से माणा गांव के लोगों से मिलकर संबोधित करेंगे। माणा गांव उत्तराखंड का एक खास गांव है। जहां कई पौराणिक रहस्य के साथ ही यह देश का आखिरी गांव कहलाता है। यह गांव छह माह बर्फ से ढका रहता है। चमोली जिले में स्थित भारत का आखिरी गांव माणा समुद्र तल से 3118 मीटर ,10227 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। जो छह माह बर्फ से ढका रहता है।

मणिभद्र देव के नाम पर माणा पड़ा
मान्यता है कि इस गांव का नाम मणिभद्र देव के नाम पर माणा पड़ा था। बद्रीनाथ आने वाले हर पर्यटक माणा गांव जरूर पहुंचते हैं। इस गांव के आगे केवल भारतीय सेना की पोस्ट है। माणा गांव सरस्वती नदी के तट पर बसा है। ये गांव बदरीनाथ से करीब तीन किमी ही दूर है। माणा का संबंध महाभारत काल से भी माना जाता है और भगवान गणेश से भी यहां की कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि माणा गांव से होकर ही पांडव स्वर्ग गए थे।
गांव का संबंध बदरीनाथ धाम से भी जुड़ा
वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से पूर्व माणा तिब्बत से व्यापार का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। लेकिन युद्ध के बाद यहां से तिब्बत की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। इस गांव का संबंध बदरीनाथ धाम से भी जुड़ा हुआ है। बदरीनाथ धाम मंदिर के कपाट बंद होने पर भगवान बदरीश को पहनाया जाने वाला घृत कंबल भी माणा गांव की महिलाएं ही तैयार करती हैं। माणा में भोटिया जनजाति के लोग रहते हैं। माणा के लोग ऊनी वस्त्र, गलीचे, कालीन, दन, शाल, पंखी सहित अन्य पारंपरिक वस्तुएं तैयार करते हैं। माणा में सरस्वती, वेदव्यास और गणेश मंदिर भी हैं। माणा गांव में एक प्रसिद्ध चाय की दुकान है जो कि भारत के आखिरी गांव में आखिरी दुकान के नाम से जानी जाती है। यहां पर्यटक आकर फोटो क्लिक करवाने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।
माणा में पर्यटन स्थल व्यास पोथी
माणा में पर्यटन स्थल व्यास पोथी नामक स्थान है, जो कि बद्रीनाथ से 3 किमी दूरी पर उत्तराखंड के माणा गांव में स्थित है। यहां महाभारत के रचनाकार महर्षि वेद व्यासजी की गुफा है। इसके समीप ही गणेश गुफा है, मान्यता है की इसी गुफा में व्यासजी ने महाभारत को मौखिक रूप दिया था और गणेशजी ने उसे लिखा था। माना जाता है की उत्तराखंड में अवस्थित पांडुकेश्वर तीर्थ में अपनी इच्छा से राज्य त्याग करने के बाद महाराज पांडु अपनी रानियों कुंती और मादरी संग निवास करते थे। इसी स्थान पर पांचों पांडवों का जन्म हुआ था।












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