उत्तराखंड में एनसीईआरटी की सिफारिशें होंगी लागू, ‘इंडिया’ की जगह लेगा ‘भारत’, विरासत को भी किया जाएगा शामिल
उत्तराखंड में जल्द ही एनसीईआरटी की सिफारिशें लागू कर दी जाएंगी। इसके लिए निदेशक एससीईआरटी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है। शिक्षा विभाग ने इसको लेकर तैयारियां तेज कर दी गई है।

उत्तराखंड में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश को लागू किया जाएगा। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने इस संबंध में निदेशक एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) को निर्देश दिए हैं। शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रविधानों के अंतर्गत प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में 'हमारी विरासत' पुस्तक सम्मिलित की जाएगी। पुस्तक के संकलन को पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है।
शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत ने बताया कि एनसीईआरटी की समिति की संस्तुतियों को प्रदेश के शैक्षिक पाठ्यक्रम में लागू करने के निर्देश स्टेट काउंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) के निदेशक को दिए गए हैं। समिति ने सभी पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रारंभ करने की संस्तुति भी की है।
राज्य सरकार स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को सम्मिलित करने का निर्णय ले चुकी है। हमारी विरासत पुस्तक को पहले चरण में कक्षा छह से आठवीं तक लागू किया जाएगा। पुस्तक के संकलन की जिम्मेदारी एससीईआरटी को दी गई है। इस संबंध में एससीईआरटी निदेशक वंदना गर्ब्याल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है।
डा. रावत ने बताया कि हमारी विरासत पुस्तक में राज्य के पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक महत्व की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त प्रदेश की महान विभूतियों, वीरांगनाओं, सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े सेनानियों, पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों, साहित्यकारों, विभिन्न आंदोलनों एवं खेलों से जुड़े व्यक्तियों का विवरण होगा। तीर्थ स्थलों, पंच प्रयागों सहित ऐतिहासिक धरोहरों एवं घटनाओं की जानकारी भी पुस्तक में रहेगी। इससे विद्यार्थियों को प्रदेश के गौरवमयी इतिहास एवं संस्कृति की सही जानकारी मिल सकेगी।
मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने कहा कि एनसीईआरटी समिति ने किताबों में 'इंडिया' शब्द की जगह 'भारत' लिखे जाने की सिफारिश की है। इसके अलावा समिति ने सभी पाठ्यक्रमों में भारती ज्ञान प्रणाली शुरू करने की भी सिफारिश की है। राज्य सरकार ने पहले ही प्रदेश के स्कूल पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने का निर्णय लिया है।












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