Mother's day देहरादून की 'मां' की संघर्ष की कहानी, रेनू रावत और बीना ऑटो चलाकर कैसे बन रहीं आत्मनिर्भर
Mother's day मां का नाम जब भी जुबान पर आता है, तो एक ऐसी तस्वीर हमारे सामने आ जाती है, जो अपने बच्चों के पालन पोषण के साथ ही घर परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए नजर आ जाती है। लेकिन आज महिलाएं घर को चलाने के लिए भी घर से बाहर निकलकर हर परिस्थिति का डटकर सामना कर रहे हैं। ऐसे में वह मां के साथ हर जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं।
मदर्स डे पर हम आपको बता रहे हैं मां के संघर्ष की कहानी। देहरादून के तहसील चौक के पास पिंक ऑटो स्टैंड बना है। यहां पर दिनभर चार महिलाएं नजर आ जाती हैं जो देहरादून में ई ऑटो चलाती हैं। आइए जानते हैं इनमें से दो महिलाओं के संघर्ष की कहानी।

पौड़ी गढ़वाल की रानू रावत देहरादून में रहकर ई ऑटो चलाती हैं। रानू के परिवार में पति और दो छोटे बच्चे भी हैं। पति के कमाई और महंगाई से घर चलाने में परेशानी हुई तो रानू ने पति के साथ कदम से कदम मिलाने का मन बनाया। रानू बच्चों की देखभाल और पढ़ाने के साथ ही दिनभर आटो चलाकर पति के साथ घर चलाने में पूरी मदद करती हैं। रानू ऑटो चलाने के साथ ही बच्चों को स्कूल लाने ले जाने के अलावा ट्यूशन भी खुद ही छोड़ने जाती हैं।
इसके अलावा घर का काम और घर की सारी जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। रानू कहती हैं कि बेटी पूछती है कि किसी की भी मां ऑटो नहीं चलाती हैं। आप ही क्यों चलाती हैं। तो रानू का कहना है कि हर काम हर किसी के लिए नहीं बना है। वो ऑटो चलाकर पति के साथ घर चलाने में पूरी मदद करती हैं, इसमें उनको खुशी मिलती है।
देहरादून के डालनवाला की बीना क्षेत्री भी ई ऑटो चलाकर बच्चों को पाल रही हैं। बीना के पति कोविड में चल बसे, जिसके बाद बच्चों और घर चलाने की जिम्मेदारी बीना के कंधों पर आ गई। बीना ने लोन लेकर ऑटो खरीदा और अब ऑटो चलाकर बच्चों को भी पाल रही हैं और घर चला रही हैं। बीना के दो बच्चे हैं। बीना घर का काम निपटाने के बाद दिन भर ऑटो चलाती हैं। बीना ने बताया कि शुरूआत में लोगों ने ऑटो चलाने पर बहुत तंज कसे, लेकिन अब सबका साथ मिल रहा है और गुजर बसर कर पा रही हैं।












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