बद्रीनाथ धाम मंदिर की दीवार पर आई हल्की दरार, एएसआई करेगा मरम्मत, इस्टीमेट तैयार
विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम मंदिर की दीवार पर आई हल्की दरार
देहरादून, 7 जुलाई। विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम मंदिर की दीवार पर आई हल्की दरार की मरम्मत कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) करेगा। मरम्मत के लिए 5 करोड़ का इस्टीमेट तैयार किया गया है। मानसून के बाद मरम्मत का कार्य किया जाएगा।

ग्लेशियर से सुरक्षा के लिए दीवार का निर्माण
पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इसका उपचार करेगा। इसके लिए एएसआई ने पांच करोड़ का इस्टीमेट तैयार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर के पीछे स्थित ग्लेशियर से सुरक्षा के लिए दीवार का निर्माण कराया जाएगा। केदारनाथ का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। इस समय केदारपुरी नए कलेवर में नजर आने लगी है। प्रधानमंत्री के निर्देश पर ही राज्य सरकार ने केदारनाथ की तरह बद्रीनाथ धाम को विकसित करने के लिए महायोजना तैयार की। प्रधानमंत्री कार्यालय में इसका प्रस्तुतीकरण होने के पुनर्निर्माण कार्यो की शुरुआत की गई। हालांकि वर्षा के कारण कार्यो की गति कुछ धीमी पड़ी है।
मानसून के बाद होगा काम शुरू
पर्यटन सचिव ने बताया कि प्रथम चरण के कार्यो के लिए भूमि अधिग्रहण हो चुका है, जबकि द्वितीय चरण में मंदिर के आसपास की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। जावलकर के अनुसार, धाम की महायोजना में मंदिर को सुरक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है। मंदिर के दाहिनी की ओर की सिंह दीवार में हल्की दरार नजर आने पर इसके उपचार के संबंध में एएसआई से अनुरोध किया गया। मानसून के बाद वह उपचारात्मक कार्य शुरू करेगा। उन्होंने बताया कि मंदिर के ठीक पीछे ग्लेशियर है। इससे मंदिर की सुरक्षा के मद्देनजर उपचारात्मक कार्यो के बारे में सुझाव लेने के लिए केंद्र सरकार की संस्था डीजीआई को कंसल्टेंट का जिम्मा सौंपा गया है। संस्था ने सुझाव दिया है कि ग्लेशियर से सुरक्षा के लिए दीवार का निर्माण कराना आवश्यक है। यह दीवार किस तरह से बनेगी, जल्द ही इसका डिजाइन तैयार कराकर कार्य शुरू कराया जाएगा।
बद्रीनाथ मंदिर के बारे में
बद्रीनाथ मन्दिर अलकनन्दा नदी से लगभग 50 मीटर ऊंचे धरातल पर निर्मित है, और इसका प्रवेश द्वार नदी की ओर देखता हुआ है। मन्दिर में तीन संरचनाएं हैं- गर्भगृह, दर्शन मंडप, और सभा मंडप। मन्दिर का मुख पत्थर से बना है, और इसमें धनुषाकार खिड़कियां हैं। चौड़ी सीढ़ियों के माध्यम से मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचा जा सकता है, जिसे सिंह द्वार कहा जाता है। यह एक लंबा धनुषाकार द्वार है। इस द्वार के शीर्ष पर तीन स्वर्ण कलश लगे हुए हैं, और छत के मध्य में एक विशाल घंटी लटकी हुई है। अंदर प्रवेश करते ही मंडप है एक बड़ा, स्तम्भों से भरा हॉल जो गर्भगृह या मुख्य मन्दिर क्षेत्र की ओर जाता है। हॉल की दीवारों और स्तंभों को जटिल नक्काशी के साथ सजाया गया है। इस मंडप में बैठ कर श्रद्धालु विशेष पूजाएं और आरती आदि करते हैं। सभा मंडप में ही मन्दिर के धर्माधिकारी, नायब रावल एवं वेदपाठी विद्वानों के बैठने का स्थान है। गर्भगृह की छत शंकुधारी आकार की है। छत के शीर्ष पर एक छोटा कपोला भी है, जिस पर सोने का पानी चढ़ा हुआ है। गर्भगृह में भगवान बद्रीनारायण की शालीग्राम से निर्मित मूर्ति है,जिसे बद्री वृक्ष के नीचे सोने की चंदवा में रखा गया है। बद्रीनारायण की इस मूर्ति को कई हिंदुओं द्वारा विष्णु के आठ स्वयं व्यक्त क्षेत्रों (स्वयं प्रकट हुई प्रतिमाओं) में से एक माना जाता है। गर्भगृह में धन के देवता कुबेर, देवर्षि नारद, उद्धव, नर और नारायण की मूर्तियां भी हैं। मन्दिर के चारों ओर पंद्रह और मूर्तियों की भी पूजा की जाती हैं। इनमें लक्ष्मी, गरुड़, और नवदुर्गा की मूर्तियां शामिल हैं। इनके अतिरिक्त मन्दिर परिसर में गर्भगृह के बाहर लक्ष्मी-नृसिंह और संत आदि शंकराचार्य , नर और नारायण, वेदान्त देशिक, रामानुजाचार्य और पांडुकेश्वर क्षेत्र के एक स्थानीय लोकदेवता घण्टाकर्ण की मूर्तियां भी हैं। बद्रीनाथ मन्दिर में स्थित सभी मूर्तियां शालीग्राम से बनी हैं।











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