लोकसभा चुनाव के बहिष्कार की सुगबुगाहट, देहरादून से मात्र 30 किमी दूर इन नौ गांवों की क्या है बड़ी समस्या
एक तरफ देश में जहां सड़कों का जाल बिछाने का दावा किया जा रहा है और केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी कहीं भी किसी सड़क को बनाने में किसी तरह की समस्या न होने का बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देहरादून से मात्र 30 किमी दूर सहसपुर विधानसभा के अंर्तगत मिसरास पट्टी के नौ गांव के हजारों लोग आज भी सड़क से वंचित है।

इन गांवों के लोगों ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भी सड़क न होने के चलते लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया लेकिन आज तक यहां के लोग पगडंडी पर चलने को मजबूर हैं। आखिर इतने सालों से यहां सड़क क्यों नहीं पहुंची, ग्रामीणों का दर्द जानने के लिए वन इंडिया की टीम पहुंची मिसरास पट्टी पंचायत। वन इंडिया यहां के प्रधान, पूर्व प्रधान, जनप्रतिनिधियों से इस पूरे मामले को समझना चाहा।
कब से चल रहा मामला
बताया गया कि मिसरास पट्टी टिहरी लोकसभा सीट में आती है। यहां के करीब नौ गांव इस बार लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं कि सड़क के लिए कोशिश नहीं हुई, लेकिन 2019 में लोकसभा चुनाव में वोट का बहिष्कार होने के बाद भी सड़क का काम शुरू नहीं हो पाया।
कहां आ रही समस्या
प्रधान दीवान सिंह पुंडीर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी समस्या इस सड़क को मसूरी बाइपास में आ रही है। जिस वजह से वन विभाग की क्लीयरेंस नहीं मिल रही है। विधायक और सभी जनप्रतिनिधियों से कई बार इस विषय पर बात की गई लेकिन कुछ नहीं हो पाया है। अब ग्रामीणों में गुस्सा है। बताया कि मिसरास पट्टी के ग्रामीणों ने 2019 के लोक सभा चुनाव का भी बहिष्कार किया था। हालांकि 2022 के विधानसभा में वोट दिया। लेकिन अब ग्रामीणों ने बैठक कर आगे से किसी भी चुनाव में वोट न देने का ऐलान कर दिया है।
मिसरास पट्टी पंचायत में नौ गांव
इस पट्टी में करीब एक हजार वोटर हैं। मिसरास पट्टी पंचायत में नौ गांव हैं। नूनियास, बकारना, पट्टी, मिसरास, कोटड़ा, भारापुर, थान गौं, बटोली। यह पट्टी उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मात्र 25 से 30 किमी है। जो कि विधानसभा सहसपुर और टिहरी लोकसभा के अंदर आती है। सहसपुर से ये मात्र 15 किमी है। राकेश पुंडीर पूर्व प्रधानपति ने बताया कि बारिश में पूरा रास्ता कीचड़ से भर जाता है। आए दिन हादसे होते रहे हैं। कच्ची रोड़ में किस तरह वे अपनी रोजमर्रा की जिदंगी जीने को मजबूर हैं। ये वे शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं के लिए रोज कच्ची सड़क पार करने में खासा मुश्किल होती रहती है। कहा कि आज तक तो बनी नहीं अब उम्मीद भी नहीं है। चुनाव आ रहे हैं, तो जनप्रतिनिधि से हिसाब मांगेंगे।
बाइपास मत बनाओ हमें गांव की रोड़ ही दे दो
संजय पंवार पहले भाजपा से जुड़े रहे, लेकिन जब सड़क की मांग पर कुछ कार्रवाई नहीं हुई तो अब पार्टी छोड़कर गांव वालों के साथ विरोध प्रदर्शन करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाइपास मत बनाओ हमें गांव की रोड़ ही दे दो। ने बताया कि डूंगा नुनियास की करीब 11 किमी की रोड की उनकी मांग है।
कच्ची सड़क बनाई
राकेश नेगी पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि इस सीट पर सालों से भाजपा के विधायक हैं। जब भी उनके पास सड़क की मांग लेकर जाओ तो वे हमेशा कुछ बहाना बताकर बात को टाल देते हैं। राकेश नेगी का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इस इलाके में कच्ची सड़क बनाई। उन्होंने बताया कि इस इलाके में सड़क की समस्या पंचायत दुधाई , मिसराज पट्टी पंचायत ,खाराखेत पंचायत, तिलवाड़ी पंचायत अमवाला पंचायत , गुजराडा करणपुर पंचायत, धुलास पंचायत आदि कई इलाकों में हैं।
सहसपुर के विधायक सहदेव पुंडीर ने वन इंडिया को बताया कि गांव के लोग चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं, ये उनके संज्ञान में नहीं है। लेकिन हाल ही में गांव के प्रधान और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर इस मामले पर आगे की कार्रवाई शुरू करने को लेकर बात हुई है। विधायक का कहना है कि इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। मसूरी बाइपास बनाने को लेकर डीपीआर भी हो चुकी है। साथ ही फॉरेस्ट लेंड होने की वजह से थोड़ी परेशानी आई लेकिन उसे भी क्लियर कर लिया गया है।












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