कुंभ कोरोना टेस्टिंग घोटाला: डेढ़ महीने बाद तैयार हुई जांच रिपोर्ट, अफसरों की मिलीभगत का हुआ खुलासा
नई दिल्ली, अगस्त 15। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान हरिद्वार में आयोजित कुंभ मेले में हुए टेस्टिंग फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट तैयार हो गई है। तीन सदस्यीय समिति ने शनिवार को 2400 पन्नों की रिपोर्ट डीएम को सौंपी। आपको बता दें कि इस जांच रिपोर्ट के सामने आने में करीब डेढ़ महीने की देरी हुई है। जिलाधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट में एक अधिकारी की संलिप्तता सामने आ रही है, जिस पर जल्द ही केस भी दर्ज किया जा सकता है। डीएम से ये रिपोर्ट अब सरकार के पास जाएगी।

15 दिन के अंदर सौंपनी थी जांच रिपोर्ट
आपको बता दें कि कुंभ के दौरान लगभग 1 लाख फर्जी कोविड टेस्ट के नतीजे सामने आने से सनसनी मच गई थी। मीडिया में इस फर्जीवाड़े को उठाए जाने के बाद मामले की प्रशासनिक जांच के आदेश दिए गए थे। सीडीओ की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी को 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन इसकी डेडलाइन को लगातार आगे बढ़ाया गया।
स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका शक के दायरे में
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कुंभ में कोरोना टेस्टिंग के दौरान अनियमितताएं बरती गई थीं। हालांकि अभी जिला प्रशासन इस जांच रिपोर्ट को लेकर कुछ भी ऑफिशियल कहने से इनकार कर रहा है। जांच रिपोर्ट में कुंभ मेला स्वास्थ्य विभाग और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा निभाई गई "भूमिका" शक के दायरे में है।
मैक्स ग्रुप के मालिक से हुई पूछताछ
इस समिति की अध्यक्षता करने वाले सीडीओ सौरभ गहरवार ने बताया है कि इस जांच रिपोर्ट को तैयार करने के लिए 40 लोगों (मामले में शामिल) के बयान दर्ज किए, जिनमें मैक्स (कॉर्पोरेट) सेवाओं के मालिक और घोटाले में शामिल अन्य प्रयोगशालाओं के साथ-साथ मेला और जिला स्वास्थ्य विभाग दोनों के अधिकारी शामिल हैं।" आपको बता दें कि मैक्स ग्रुप उन 9 कंपनियों में से एक थी, जिन्हें कुंभ के दौरान टेस्टिंग का जिम्मा दिया गया था।












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