जानिए कौन है सरस्वती,जो बनीं सबसे कम उम्र की देह दान करने वाली डोनर,किस बीमारी से थी पीड़ित
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ढाई दिन की बच्ची का दून अस्पताल में देह दान किया गया। जो कि सबसे कम उम्र की डोनर बन गई हैं। बच्ची के शव को दून मेडिकल कॉलेज के म्यूजिम में रखा जाएगा। इससे पहले बच्ची का नामकरण भी किया गया। जो कि सरस्वती रखा गया।
सरस्वती हृदय संबंधी रोग (एसफिक्सिया बीमारी) से बच्ची का निधन हो गया था। महज ढाई दिन की बच्ची के देह दान किए जाने का यह देश का पहला मामला बता रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची को हृदय संबंधी रोग थी, डॉक्टर्स की टीम ने बच्ची को काफी बचाने की कोशिश की। लेकिन उसका निधन हो गया।

बच्ची के पिता राम मिहर हरिद्वार में एक फैक्ट्री में कार्यरत हैं। मिली जानकारी के अनुसार हरिद्वार के डॉ राजेंद्र सैनी ने परिवार को देह दान के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद परिवार ने दधीचि देह दान समिति के मुकेश गोयल से संपर्क किया। समिति के माध्यम से आज सुबह बच्ची का देह दान किया गया।
दून अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि 9 दिसंबर को दून अस्पताल में जन्मी बच्ची को हार्ट से रिलेटेड प्रॉब्लम थी। जिसका 11 दिसंबर की सुबह निधन हो गया। दधीचि देहदान समिति ने बच्ची के माता-पिता को देहदान करवाने के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद माता पिता राजी हो गए। उनके मुताबिक समूचे देश में ढाई दिन की बच्ची का देहदान किए जाने का पहला मामला प्रकाश में आया है। दून अस्पताल प्रशासन ने बच्ची का देहदान करने वाले माता-पिता को पौधा भेंट कर सम्मानित किया है।
एसफ़िक्सिया यानी जन्म श्वासरोध, एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे को जन्म के बाद सांस लेने में दिक्कत होती है और उसका मस्तिष्क ऑक्सीजन से वंचित रहता है। यह जानलेवा हो सकता है और बच्चे को दिमागी रूप से कमज़ोर बना सकता है। इसलिए, तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।












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