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Kedarnath रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के आने से जमकर हुई धनवर्षा, एसएचजी महिलाओं ने प्रसाद बेचकर कमाए 43.50 लाख रुपये

केदारनाथ:एसएचजी महिलाओं ने प्रसाद बेचकर कमाए 43.50 लाख रुपये

Kedarnath केदारनाथ धाम में इस बार कई रिकॉर्ड टूटे हैं। एक तरफ श्रद्धालुओं के दर्शन का आंकड़ा 15 लाख पहुंचा वहीं हेली सर्विस से डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस तरह केदारनाथ में इस सीजन में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। जिसका लाभ स्थानीय लोगों और रोजगार को भी मिला है। उत्तराखंड सूचना विभाग ने बताया है कि स्वयं सहायता समूहों,एसएचजी, की महिलाओं ने इस वर्ष केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान प्रसाद बेचकर 43.50 लाख रुपये कमाए हैं।

 Kedarnath record arrival devotees h s g women earn Rs 43.50 lakh selling prasad

15 लाख 63 हजार से ज्यादा यात्रियों ने केदारनाथ पहुंचकर बाबा के दर्शन किए
कोरोना की वजह से दो साल तक चारधाम यात्रा न चलने से स्थानीय लोगों को काफी नुकसान हुआ लेकिन इस बार रिकॉर्ड यात्रियों के पहुंचने से स्थानीय लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। जिससे स्थानीय लोगों पर जमकर धनवर्षा हुई है। एक तरफ इस वर्ष रिकॉर्ड 15 लाख 63 हजार से ज्यादा यात्रियों ने केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन किए। वहीं जिले में संचालित महिला समूहों के लिए भी यह यात्रा चेहरे पर मुस्कान देकर गई। कोरोनाकाल के बाद इस वर्ष महिला समूहों के व्यवसाय को नई ऊंचाइयां मिली। केदारनाथ यात्रा से जुडे़ विभिन्न महिला समूहों ने इस वर्ष करीब 48 लाख रुपए का व्यापार किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी लगातार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की मांग करते आ रहे हैं। मोदी ने माणा गांव में भी एक बार फिर पर्यटकों से अपील की कि वे अपनी यात्रा खर्च का 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों को खरीदने में लगाए। इससे आत्मनिर्भरता एवं स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद तैयार कर अन्य उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं महिलाएं

रूद्रप्रयाग जिले की महिलाएं सीधे तौर पर केदारनाथ यात्रा में अपना योगदान दे रही हैं। जिले में महिलाएं बाबा केदारनाथ धाम के लिए स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद तैयार करने के साथ ही अन्य उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। केदारनाथ में दुनियाभर से आने वाले तीर्थ यात्रियों को स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद एवं बाबा केदारनाथ के सोविनियर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय शहद, हर्बल धूप समेत कई उत्पाद महिलाएं तैयार कर यात्रियों को उपलब्ध करवा रही हैं। इसके अलावा स्थानीय खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के लिए सरस रेस्तरां एवं हिलांस कैफे भी यात्रा मार्ग पर संचालित हो रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार चैलाई के लड्डू, हर्बल धूप, चूरमा, बेलपत्री, शहद, जूट एवं रेशम के बैग आदि पहुंचता है। इससे जहां महिलाओं की आमदनी और रोजगार बढ़ रहा है, वहीं स्थानीय किसानों की आय भी बढ़ना तय है। जो कि कच्चा माल उपलब्ध करा रहे हैं।

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