Kedarnath: गर्भ गृह के दर्शन के लिए मिलेंगे टोकन, स्लॉट सिस्टम से ही दर्शन, जानिए क्या हुए नियमों में बदलाव
केदारनाथ धाम के लिए अब तक सबसे ज्यादा 5.41 लाख रजिस्ट्रेशन हुए है। दर्शन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्लॉट सिस्टम तेयार किया गया है। जिसमें एक-एक घंटे के हिसाब से 1250 टोकन वितरित किए जाएंगे।

केदारनाथ धाम को लेकर श्रद्धालुओं में इस बार सबसे ज्यादा उत्सुकता नजर आ रही है। केदारनाथ के लिए अब तक सबसे ज्यादा 5.41 लाख रजिस्ट्रेशन हुए है। ऐसे में मंदिर समिति और प्रशासन अभी से दर्शन कराने के लिए नियम और व्यवस्थाओं पर फोकस कर रही है। जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
यात्रा 25 अप्रैल से शुरू
केदारनाथ धाम की यात्रा 25 अप्रैल से शुरू हो रही है। श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए दर्शन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्लॉट सिस्टम तेयार किया गया है। जिसमें एक-एक घंटे के हिसाब से 1250 टोकन वितरित किए जाएंगे। प्रशासन ने कपाट खुलते ही यात्रियों की संख्या के हिसाब से गर्भगृह से श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था का निर्णय लिया जाएगा।
13 हजार प्रति दिन की सीमा निर्धारित
जिसमें गर्भगृह के दर्शन के लिए स्लॉट सिस्टम तैयार किया गया है। सरकार ने इस बार केदारनाथ यात्रा के लिए 13,000 तीर्थयात्रियों की प्रति दिन की सीमा निर्धारित की है और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए एक टोकन प्रणाली भी शुरू की गई है।बता दें कि साल 2022 में केदारनाथ यात्रा में रिकॉर्ड 16 लाख यात्री पहुंचे थे। इस बार कपाट खुलने से पहले ही रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 5 लाख पार हो गया है। जबकि कपाट खुलने से 6 माह तक बाबा केदार के दर्शन हो पाएंगे।
गर्भ गृह का दर्शन करने का सौभाग्य
चारों धामों में से केदारनाथ धाम में ही श्रद्धालुओं को गर्भ गृह का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है। इस बार बाबा केदार के दर्शन सबसे खास होने जा रहा है। श्रद्धालुओं को पहली बार स्वर्ण मंडित गर्भगृह में बाबा केदार के दर्शन होंगे। गर्भगृह की दीवारों पर चांदी की जगह सोने की परत चढ़ाई गई है। इसके साथ ही केदारनाथ मंदिर में सोने का कलश स्थापित किया जाएगा।
गर्भगृह की दीवारों पर चांदी की जगह सोने की परत
पिछले साल 27 अक्तूबर 2022 को कपाट शीतकाल के लिए बंद हुए थे। कपाट बंद होने से कुछ दिन पहले बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने गर्भगृह की दीवारों पर चांदी की जगह सोने की परत चढ़ाई थी। साथ ही विशेष लाइटें भी लगाई गई हैं जिससे स्वर्ण मंडित गर्भगृह की आभा और चमकेगी। अब केदारनाथ मंदिर पर लगे चांदी का कलश इस बार यात्रा सीजन में ही सोने का कलश स्थापित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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