Kedarnath dham साढ़े 9 लाख तीर्थयात्री कर चुके बाबा केदार के दर्शन,पशुओं की मृत्यु दर में पचास प्रतिशत की कमी
केदारनाथ धाम यात्रा में अब तक साढ़े 9 लाख तीर्थयात्री बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। पिछले सीजन में अब तक साढ़े 6 लाख यात्री ही बाबा के दर्शन कर पाए थे।
इसके साथ ही इस बार श्रद्धालुओं के साथ साथ पशुओं का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। घोड़े-खच्चरों और हॉकरों की निगरानी को लेकर पैदल पड़ावों में टीमें तैनात की गई हैं।

पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि पशुओं की मृत्यु दर में पचास प्रतिशत की कमी आई है। मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष इस समय तक 6.50 लाख के करीब तीर्थयात्री केदारनाथ पहुंचे थे। लेकिन इस साल यह आंकड़ा 9.50 लाख के पार हो गया है।
उन्होंने बताया कि गौरीकुंड-केदारनाथ 19 किमी पैदल मार्ग पर शौचालय, पेयजल, स्वास्थ्य, बिजली सहित अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। केदारनाथ पैदल मार्ग पर 11 करोड़ की लागत से चार जगहों पर टिनशेड निर्माण किया गया है, इसके साथ ही अन्य कार्य भी हो रहे हैं।
कहा कि पहले पैदल यात्रा मार्ग पर पशुओं के लिए आराम करने की जगह नहीं थी। लेकिन अब टिनशेडों के निर्माण से उन्हें आराम भी मिल रहा है। रूद्रा प्वाइंट, बड़ी लिनचोली, सोनप्रयाग और त्रियुगीनारायण मार्ग पर टिनशेड निर्माण किए गए हैं।
बहुगुणा ने बताया कि यात्रा मार्ग पर संचालित पशुओं पर टिटनेस के इंजेक्शन टीके लगाए गए हैं। जबकि पहले एंटी टिटनेस के इंजेक्शन भी लगाए गए हैं। जिससे घोड़े-खच्चरों की मौत में भी कमी आई है। पशुओं पर टैग लगाए हैं और 6 स्कैनर अधिकारियों को दिए गए हैं। इससे रजिस्टर्ड घोड़े की पहचान हो रही है। यात्रा मार्ग पर 24 घंटे गर्म पानी की व्यवस्था गौरीकुंड में की गई है। जबकि तीन और जगहों पर गर्म पानी की व्यवस्था की जा रही है।
उन्होंने बताया कि जहां पिछली यात्रा में अब तक की यात्रा में 68 पशुओं की मौत हुई थी। वहीं इस वर्ष की यात्रा में अब तक 35 घोड़े-खच्चरों की मौत हुई है। पशुओं की मृत्यु दर में पचास प्रतिशत की कमी आई है। पशुपालन मंत्री ने बताया कि बीमार और चोटिल पशुओं के संचालन पर रोक लगाई गई है। केदारनाथ के लिए रोपवे निर्माण होने के बाद पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का दबाव कम होगा।












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