Joshimath Sinking: लगातार धंस रहे जोशीमठ से आईं राहत भरी 3 खबरें
उत्तराखंड के जोशीमठ में राहत कार्य जारी है। इस बीच वहां से तीन राहत भरी खबरें भी सामने आई हैं। सबसे अहम बात ये है कि वहां पानी का रिसाव कम हो रहा है।

उत्तराखंड का छोटा सा कस्बा और बंद्रीनाथ धाम के प्रवेशद्वार जोशीमठ में पिछले कुछ दिनों से हालात भयवाह हैं। वहां पर 700 से ज्यादा मकानों में बड़ी दरारें पड़ गईं, जिस वजह से हजारों लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा। केंद्र सरकार की अलग-अलग टीमें राज्य के साथ मिलकर वहां पर राहत कार्य चला रहीं। हालांकि एक्सपर्ट लगातार ये कह रहे थे कि अब देर हो चुकी है, ऐसे में जोशीमठ को बचाना मुश्किल है, लेकिन इस बीच वहां से 3 राहत भरी खबरें सामने आई हैं।

पानी का रिसाव हुआ कम
आरोप है कि जोशीमठ में पावर प्रोजेक्ट के लिए टनल का निर्माण हुआ था, उसकी वजह से ही पानी का रिसाव हो रहा। जब जमीन के नीचे पानी आया, तो मकानों की मजबूती कमजोर होती चली गई और उसमें दरारें आनी शुरू हुईं। राहत की बात ये है कि जेपी कंपनी के पास पानी का रिसाव कम हो रहा है और मंगलवार शाम ये 250 एलपीएम तक पहुंच गया।

7 जनवरी से कोई नई दरार नहीं
वहीं जमीनी स्तर पर सरकार ने कई अहम फैसले लिए, जिसके तहत ज्यादातर बड़े निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई। जिसका सीधा असर अब देखने को मिल रहा है। मामले में सीएम के सचिव ने कहा कि 7 जनवरी के बाद कोई नई दरार नहीं आई। ऐसे में स्थिति स्थिर बनी हुई है।

पुरानी दरारें बढ़ी नहीं
वैसे तो 700 से ज्यादा घरों, होटलों आदि में दरारें हैं। सरकार का दावा है कि पुरानी दरारें बढ़ी नहीं हैं, वो ज्यों की त्यो हैं। सीएम के सचिव के मुताबिक 2 इमारतें जो असुरक्षित हैं, उन्हें गिराने की जरूरत है। ऐसे में लोगों से समर्थन की अपील की जा रही है।

131 परिवार राहत शिविर में
जिला प्रशासन के मुताबिक 723 भवनों को चिह्नित किया गया है। जिसके तहत 131 परिवार के 462 लोगों को अस्थायी शिविरों में शिफ्ट किया गया। अभी तक 1.30 लाख प्रति घर के हिसाब से 10 लोगों को 13 लाख की राहत राशि दी गई है। इसके अलावा लोगों को खाने-पीने की चीजें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रहीं।












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