Joshimath Land Sinking: जोशीमठ में ही बजरंगबली ने किया था 'कालनेमी' का वध, पांडवों को दिए थे दर्शन

वेदव्यास के मुताबिक पांडवों को पवनपुत्र हनुमान ने जोशीमठ में ही दर्शन दिए थे। यहीं पर उनका वृद्ध रूप दिखा था।

Joshimath Land Sinking:

Joshimath Land Sinking: 'सोचा ना था एक दिन सर से उठ जाएगी ये छत, दर्द तो इस बात का है कि आज पैरों तले जमीं भी नहीं ' ... ये ही बात आज जोशीमठ के हर उस व्यक्ति के जेहन में हैं जो भू-धंसाव की वजह से बेघर हो गया है। बता दें कि जोशीमठ के कई घरों और होटलों में दरार आ गई है, जिसके पीछे कारण यहां की जमीन का धंसना है,इसी वजह से सरकार ने अब उन्हें गिराने का फैसला किया है। मालूम हो कि उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित जोशीमठ आस्था का पर्याय रहा है इसलिए ये सैलानियों के पसंदीदा पर्यटन स्थलों मे भी गिना जाता है।

जोशीमठ से गुजरे थे पवनपुत्र हनुमान

जोशीमठ से गुजरे थे पवनपुत्र हनुमान

गौरतलब है कि जोशीमठ का जिक्र धार्मिक पुराणों में भी मिलता है। महर्षि बाल्मिकी ने 'रामायण' में लिखा है कि 'जब लक्ष्मणजी मेघनाद के शक्तिबाण के कारण मूर्छित हो गए थे और बजरंग बली ने संजीवनी बूटी लाने के लिए उड़ान भरी थी तो वो उत्तराखंड के जोशीमठ से ही गुजरे थे।'

कालनेमी राक्षस का वध

यहीं पर उन्हें रोकने के लिए असुर रावण ने 'कालनेमी राक्षस' को भेजा था और बजरंग बली ने जोशीमठ की ही धरती पर उसका वध किया था।

पांडवों को दिए थे दर्शन

पांडवों को दिए थे दर्शन

केवल 'रामायण' में ही नहीं बल्कि 'महाभारत' में भी वेद व्यास ने जोशीमठ का जिक्र किया है। उनके मुताबिक पांडवों को जोशीमठ में ही बजरंगबली ने दर्शन दिए थे। यहीं पर उनका वृ्द्ध रूप दिखा था और कहा तो यह भी जाता है कि जोशीमठ से ही पांडवों ने स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया था।

जोशीमठ को 'ज्योतिमठ' भी कहा जाता है

जोशीमठ को 'ज्योतिमठ' भी कहा जाता है

इससे अलावा यही वो धरती है जहां 8वीं सदी में धर्मसुधारक आदि शंकराचार्य को ज्ञान प्राप्त हुआ था और उन्होंने पहले मठ की स्थापना यहीं की थी इसलिए जोशीमठ को 'ज्योतिमठ' भी कहा जाता है।

शीतकाल में भगवान बदरी की विश्रामस्थली

यही नहीं शीतकाल में 'भगवान बदरी' यहीं निवास भी करते हैं, इसलिए जोशीमठ के लोग आपदा की इस घड़ी में 'भगवान बदरी' से सबकुछ ठीक कर देने की भी प्रार्थना कर रहे हैं।

 प्रकृति का अनुपम उपहार

प्रकृति का अनुपम उपहार

जोशीमठ केवल आस्था का ही मानक नहीं है बल्कि इसे प्रकृति ने अपने दोनों हाथों से संवारा है। यहां की खूबसूरत पहाड़ियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं तो वहीं ललितशूर के तांब्रपत्र में जोशीमठ को कत्यूरी राजाओं की राजधानी 'कार्तिकेयपुर' बताया गया है।

नरसिंह की तपोभूमि

तो वहीं कुछ पुराणों में इसे भगवान विष्णु के रूप नरसिंह की तपोभूमि भी कहा गया है।

धारा-33 एवं 34 के तहत पुनर्वास

धारा-33 एवं 34 के तहत पुनर्वास

आपको बता दें कि जोशीमठ के दरकते भवनों को जमींदोज करने का काम शुरू हो गया है, जिसे कि नियमबद्ध तरीके से अंजाम दिया जा रहा है तो वहीं इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। जबकि सरकार की ओर से कहा गया है कि जोशीमठ के प्रभावितों का आपदा अधिनियम की धारा-33 एवं 34 के तहत पुनर्वास किया जाएगा।

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