जागेश्वर धाम में खुदाई में धरती से निकला अदभुत लिंग, दर्शन के लिए उमड़े भक्त, जानिए क्यों प्रसिद्ध है जागेश्वर
उत्तराखंड के जागेश्वर धाम के मंदिर समूह में भगवान शिव का एक अदभुत लिंग धरती से खुदाई के दौरान सामने आया है। जिससे भक्तों में जबरदस्त उत्साह नजर आया और हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है।
जागेश्वर धाम में इन दिनों मास्टर प्लान के तहत लाइटिंग के लिए केबल बिछाने का काम चल रहा है। इसके लिए कार्यदायी संस्था पूरे मंदिर समूह में खुदाई कार्य कर रही है।

बताया जा रहा है कि खुदाई के दौरान श्रमिकों को जागेश्वर मंदिर के ठीक पीछे धरती के नीचे एक प्राचीन शिवलिंग मिला। कुछ ही देर में इसकी जानकारी पूरे इलाके में पहुंच गई थी। जानकारी मिलते ही स्थानीय पुजारी और भक्तजन अदभुत शिवलिंग के दर्शन को दौड़ पड़े।
इसके बाद वहां पर कई लोगों ने पूजा अर्चना भी शुरू की। मंदिर समिति ने आगे इस को लेकर योजना बनाने की बात की है। जागेश्वर धाम भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। अल्मोड़ा जनपद से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित जागेश्वर धाम में लगभग ढाई सौ छोटे-बड़े मंदिरों का समूह है।
इनमें से एक ही स्थान पर छोटे-बड़े 224 मंदिर हैं। 125 छोटे-बड़े मंदिरों के समूह में 108 शिवलिंग और 17 अन्य देवी देवताओं के मंदिर स्थित है। यह मंदिर लगभग ढाई हजार वर्ष पुराना है। मान्यता है कि यह प्रथम मंदिर है. जहां लिंग के रूप में शिव पूजन की परंपरा सबसे जागेश्वर धाम भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।
अल्मोड़ा जनपद से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित जागेश्वर धाम में लगभग ढाई सौ छोटे-बड़े मंदिरों का समूह है। इनमें से एक ही स्थान पर छोटे-बड़े 224 मंदिर हैं। 125 छोटे-बड़े मंदिरों के समूह में 108 शिवलिंग और 17 अन्य देवी देवताओं के मंदिर स्थित है।
यह मंदिर लगभग ढाई हजार वर्ष पुराना है। मान्यता है कि यह प्रथम मंदिर है. जहां लिंग के रूप में शिव पूजन की परंपरा सबसे पहले शुरू हुई थी। इस स्थल को भगवान शिव की तपस्थली भी कहा जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ विष्णु, देवी शक्ति और सूर्य देवता की पूजा की जाती है।
जागेश्वर धाम को पुराणों में हाटकेश्वर के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान भोलेनाथ और सप्त ऋषियों ने यहां पर तपस्या की थी। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ विष्णु, देवी शक्ति और सूर्य देवता की पूजा की जाती है। जागेश्वर धाम को पुराणों में हाटकेश्वर के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान भोलेनाथ और सप्त ऋषियों ने यहां पर तपस्या की थी।












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