उत्तराखंड में कांग्रेस संगठन को खड़ा करने में जुटी, प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष पर भी साधने होंगे समीकरण

कांग्रेस ने 10 लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा

देहरादून, 28 मार्च। उत्तराखंड में करारी हार के बाद कांग्रेस अब नए सिरे से संगठन को खड़ा करने में जुट गई है। कांग्रेस ने संगठनात्मक चुनावों को देखते हुए 10 लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ​ ही ब्लॉक, जिला और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों के निर्वाचन को लेकर भी रणनीति पर काम शुरू हो गया है।जिसके आधार पर ही नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगेगी। लेकिन ये तय है कि पार्टी कुछ नए प्रयोग कर सकती है।

 In Uttarakhand, the Congress is busy in setting up the organization, the state president and the leader of the opposition will also have to deal with the equation

ब्लॉक स्तर से प्रदेश स्तर पर संगठन में भारी बदलाव

प्रदेश में करारी हार के बाद कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियों में जुट गई है। इसके लिए पहले संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। ​कांग्रेस हाईकमान ने पहले ही प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा लेकर संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का संकेत दिया। जिसके बाद एक ​बार फिर से ब्लॉक स्तर से प्रदेश स्तर पर संगठन में भारी बदलाव किया जा रहा है। ऐसे में पहले नए सदस्य बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जिसके लिए सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। इसके आधार पर ही पार्टी में चुनाव होगा।

नए ​कप्तान की तलाश
प्रदेश में कांग्रेस को अब नए कप्तान की भी तलाश है। जो कि लोकसभा चुनाव तक पार्टी को मजबूत स्थिति में ला सके। हालांकि गणेश गोदियाल को हाईकमान से इस्तीफा लेने के बाद भी कांग्रेस का एक खेमा दोबारा उन्हें ही कुर्सी सौंपने की बात कर रहा है। जबकि दूसरा खेमा भुवन कापड़ी, यशपाल आर्य समेत दूसरे विधायकों में से किसी एक को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने की वकालत कर रहे हैं। इधर खबर ये भी है कि हरक सिंह रावत भी अध्यक्ष के लिए पैरवी कर रहे हैं। जिसका कम ही समीकरण नजर आ रहे हैं। हाईकमान को पहले नेता प्रतिपक्ष के नाम पर मुहर लगानी है। जिसमें प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य, राजेंद्र भंडारी समेत कई विधायकों के नाम लिए जा रहे हैं। हालांकि ज्यादातर दांव प्रीतम सिंह के नाम पर ही खेला जा रहा है। हाईकमान के सामने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की चुनौती है। जिसके आधार पर ही नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगेगी। लेकिन ये तय है कि पार्टी कुछ नए प्रयोग कर सकती है। ऐसे में जिले से लेकर पीसीसी तक नए चेहरे नजर आ सकते हैं। इस बार पार्टी युवा और नए चेहरों पर दांव खेल सकती है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुुनौती खेमे बाजी खत्म करनी है। अभी हरीश रावत और प्रीतम खेमा ही सक्रिय हैं। इनके अलावा किसी नए चेहरे को लेकर पार्टी खेमे बाजी खत्म कर सकती है।

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