उत्तराखंड में भाजपा ने हरक सिंह को लेकर चला आखिरी दांव, प्रदेश अध्यक्ष की रणनीति होगी कितनी कारगर
उत्तराखंड में भाजपा ने हरक सिंह को लेकर चला आखिरी दांव, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को सौंपी जिम्मेदारी
देहरादून, 26 अक्टूबर। उत्तराखंड की सियासत इन दिनों हरक सिंह रावत के इर्द गिर्द घूम रही है। हरक सिंह रावत को लेकर भाजपा और कांग्रेस में खलबली मची हुई है। पूर्व सीएम हरीश रावत के फोन पर हरक सिंह रावत से बातचीत और बयानबाजी के बाद अब भाजपा हाईकमान अलर्ट हो गया है। गुरुवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने हरक सिंह रावत को ब्रेकफास्ट या लंच के लिए अपने आवास पर बुलाया। जिसके बाद से एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा के इस कदम को डेमेज कंट्रोल और आखिरी दांव के रूप में माना जा रहा है। हालांकि हरक सिंह ने मदन कौशिक के साथ न तो ब्रेकफास्ट किया और नहीं लंच। इसको लेकर भी सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
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चुनाव में गेमचेंजर हैं हरक सिंह
उत्तराखंड के सर्द मौसम में राजनीति का पारा तेजी से चढ़ता जा रहा है। राजनीति के पारे को बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान है कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का। हरक सिंह रावत बयानबाजी में सबसे दबंग नेता माने जाते हैं। साथ ही चुनाव में गेमचेंजर की भूमिका भी निभाते आ रहे हैं। हरक सिंह ही पूर्व सीएम हरीश रावत की सरकार को गिराने के लिए सबसे पहले बगावत करने वालों का नेतृत्व कर चुके हैं। जिसके बाद दर्जनभर विधायक भाजपा में शामिल हुए। इसके कारण ही 2017 में भाजपा सत्ता में आई। अब चुनाव से पहले हरक सिंह का भाजपा से मोहभंग और कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ती जा रही हैं। जिस कारण भाजपा में बैचनी नजर आ रही है। हालांकि हाईकमान की हरक सिंह रावत की हर चाल पर नजर है। ऐसे में अब जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मदन कौशिक ने गुुरुवार सुबह ही हरक सिंह रावत को फोन कर अपने आवास पर ब्रेकफास्ट के लिए बुलाया। हरक सिंह ने व्यस्त होने के कारण देर से आने की बात कही। जिसके बाद मदन कौशिक ने हरक को लंच पर बुलाया। लेकिन हरक सिंह न ब्रेकफास्ट करने पहुंचे नहीं लंच किया। हरक सिंह दोपहर बाद मदन कौशिक के घर पहुंचे।
लोहाघाट विधायक भी तलब
इस बीच लोहाघाट विधायक लोहाघाट के विधायक पूरन फर्त्याल भी मदन कौशिक के आवास पर नजर आए। लंबी बातचीत के बाद जब तीनों बाहर आए तो चुनाव तैयारियों का हवाला देकर सामान्य मुलाकात बताने लगे। हालांकि मीडिया में तीनों की मुलाकात को लेकर अपने-अपने दावे सामने आने लगे। लेकिन हरक सिंह और पूरन ने जिस तरह से बीते दिनों में अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। उससे पार्टी हाईकमान भी नाराज बताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी ने विधायकों को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने का संदेश दिया है। जिसके लिए प्रदेश अध्यक्ष को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हरक पर हाईकमान गंभीर
हरक सिंह के मुद्दे पर पार्टी हाईकमान गंभीर हो गई है। पार्टी हाईकमान का यह दांव अब डेमेज कंट्र्रोल और आखिरी दांव के रुप में माना जा रहा है। पूर्व सीएम हरीश रावत और हरक सिंह रावत के बीच अचानक बड़े भाई और छोटे भाई वाला रिश्ता जाग गया है। जिससे भाजपा भी अलर्ट हो गई है। लगातार हरक सिंह रावत के कांग्रेस में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। जिससे उत्तराखंड में भाजपा के लिए हरक सिंह रावत को चुनाव तक संभालना मुश्किल हो सकता है। हरक सिंह के पार्टी छोड़ने से भाजपा को इस बात का डर है कि उनके साथ कांग्रेस के पुराने चेहरे और भाजपा के कुछ विधायक भी पाला बदल सकते हैं। ऐसे में पार्टी डेमेज कंट्रोल करने में भी जुटी है। साथ ही हरक सिंह को हर तरफ से पार्टी मनाने की कोशिश भी कर रही है।












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