हरीश रावत की उत्तराखंड और पंजाब में दोहरी जिम्मेदारी, चुनाव में पड़ सकती है भारी
पंजाब की टेंशन से हरीश रावत की बढी मुश्किलें
देहरादून, 29 सितंबर। उत्तराखंड में कांग्रेस की चुनाव की कमान संभाल रहे पूर्व सीएम हरीश रावत की टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है। हरीश रावत की टेंशन का कारण उत्तराखंड की पॉलिटिक्स से ज्यादा पंजाब की पॉलिटिक्स है। जब तक हरीश रावत पंजाब का एक मुद्दा सुलझाने के बाद उत्तराखंड पर फोकस करने की सोचते हैं। तब तक पंजाब में दूसरा बखेड़ा खड़ा हो जाता है। ऐसे में हरीश रावत के सामने पंजाब और उत्तराखंड में बेलेंस करने की चुनौती बनी हुई है। जिसका नुकसान भी हरीश रावत को उठाना पड़ सकता है।

दोहरी जिम्मेदारी पड़ रही भारी
पूर्व सीएम हरीश रावत 2022 विधानसभा चुनाव के लिए दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उत्तराखंड और पंजाब दोनों राज्य मे चुनाव होने हैं। हरीश रावत दोनों प्रदेश में कांग्रेस के लिए अहम कड़ी हैं। पंजाब कांग्रेस के हरीश रावत प्रभारी है। जबकि उत्तराखंड में वे चुनाव अभियान समिति की कमान संभाल रहे हैं। लेकिन पंजाब के अंदर कांग्रेस में चल रही उठापटक के कारण हरीश रावत दोनों में से किसी एक प्रदेश में पूरी तरह से फोकस नहीं कर पा रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में कांग्रेस अब तक 3 बड़े इवेंट की प्लानिंग कर चुकी है, जिसमें से 2 बड़े इवेंट परिवर्तन यात्रा के रुप में हो चुके हैं। और तीसरा 1 अक्टूबर से गांव में प्रवास का कार्यक्रम है। हरीश रावत जब भी उत्तराखंड में कोई कार्यक्रम तय करते हैं। पंजाब कांग्रेस में बखेड़ा खड़ा हो जाता है। जिससे हरीश रावत का फोकस उत्तराखंड में नहीं बन पा रहा है। पहले नवजोत सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर के बीच जंग को सुलझाया, उसके बाद कैप्टन के इस्तीफे के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाने के बीच पार्टी के मजबूत स्तंभ की तरह खड़े नजर आए। इस बीच कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा उत्तराखंड में हुई, लेकिन हरीश रावत यात्रा के समापन पर ही पहुंच पाए। अब जब हरीश रावत ने कोटद्वार प्रवास का कार्यक्रम तय किया हुआ है, तो नवजोत सिद्धू के इस्तीफे के बाद से पंजाब कांग्रेस में उथल पुथल मची है। हरीश रावत फिलहाल केन्द्रीय नेतृत्व के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जिसके लिए उन्हें वेट एंड वॉच की स्थिति में रहना होगा।

दुविधा में हरदा
हरीश रावत इस समय हाईकमान के निर्देश के कारण दोहरी दुविधा में फंसे हुए हैं। नहीं हरीश रावत को पंजाब प्रभार से मुक्त किया जा रहा है। और नहीं वे उत्तराखंड में कांग्रेस का सीएम चेहरा बनाए जा रहे हैं। हाईकमान दोनों ही मामलों में बड़ा फैसला नहीं ले पा रही है। इससे हरीश रावत के रजनैतिक विरोधियों को दोनों राज्यों में उन पर हमला करने का मौका मिल रहा है। पंजाब में नाराज गुट के विधायक और नेता कई बार हरीश रावत की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर चुके हैं। वहीं उत्तराखंड में विरोधी गुट पूरी तरह से हरीश रावत पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने हरीश रावत के सामने मोर्चा खोला हुआ है। जिससे उनकी राजनीति पर भी असर पड़ रहा है।

भाजपा का हमला, उज्याड़ बल्द पर किया कटाक्ष
पूर्व सीएम हरीश रावत के पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी और पंजाब टेंशन का द एंड न होने के कारण उत्तराखंड में भाजपा को हरीश रावत पर सियासी वार करने का मौका मिल गया है। हरीश रावत पर लगातार भाजपा हमला कर रही है। उत्तराखंड भाजपा ने टिवट कर लिखा है कि पंजाब से उजाड़ खाकर वापस आए "उज्याड़ बल्द" को उत्तराखंड की जनता भी "अंधेरी" दे देगी! , सोशल मीडिया में हरीश रावत को भाजपा ने घेरते हुए एक पोस्टर जारी किया है, जिसमें सिद्धू के इस्तीफे के बाद इस्तीफों की बाढ़ पर भाजपा ने तंज कसा है। इस पोस्टर में हरीश रावत को उज्याड़ बल्द को अंधेरी कोठरी में डालते हुए दिखाया गया है। आपको बता दें कि हरीश रावत ने उत्तराखंड में दलबदल करने वाले बागियों को उज्याड़ बल्द कहा था। जो कि गांवों में दूसरों के खेत में जाकर उत्पात मचाते हैं। इस तरह से हरीश रावत के कटाक्ष से अब भाजपा ने उन पर ही हमला कर दिया है।












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