Harish rawat: लोकसभा में हार को लेकर नहीं थम रही रार,पूर्व सीएम की फेसबुक पोस्ट से मचा हड़कंप,कह दी बड़ी बात
उत्तराखंड में कांग्रेस लोकसभा चुनावों में पांचों सीट हार गई।जिसको लेकर अब तक पार्टी के अंदर अब तक बयानबाजी और सियासत जारी है।
इसके बाद हार के कारणों का पता लगाने के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य पूर्व सांसद पीएल पुनिया देहरादून में तीन दिन रहकर प्रत्याशियों, सीनियर नेताओं और पदाधिकारियों से फीडबैक लेकर चले गए।

जो अब अपनी रिपोर्ट कांग्रेस कमेटी को सौंपेंगे। लोकसभा चुनाव में हार को लेकर लगातार कांग्रेस के अंदर बयानबाजी जारी है। पहले प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का सीनियर नेताओं के चुनाव में उतरने को लेकर दिए गए बयान के बाद पार्टी के अंदर विरोधाभास जारी रहा।
अब पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक बार फिर इस बात का खुलकर विरोध किया है कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को यह कहा गया कि चुनाव में हारने का कारण वरिष्ठ नेताओं का चुनाव न लड़ना है। हरीश रावत का कहना है कि
मंगलौर और बद्रीनाथ के उपचुनाव के बाद कांग्रेस में एकजुटता का वातावरण बना।
अब समाचार पत्रों में सिलेक्टिव लिक आ रही है कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को यह कहा गया कि चुनाव में हारने का कारण वरिष्ठ नेताओं का चुनाव न लड़ना है। दूसरा कारण यह छपाया गया है कि पार्टी ने कमजोर उम्मीदवार खड़े किये और पीएससी के सुझावों को नहीं माना अन्यथा चुनाव के परिणाम सुखद होते।
हरदा का कहना है कि कांग्रेस का प्रत्येक छोटा बड़ा नेता अपने सुझाव देने देहरादून आया और कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने प्रत्येक दिन 8-8, 9-9 घंटे लगातार उन्हें सुना, इस सिलेक्टिव लिक विशेषज्ञ द्वारा इस तथ्य को प्रमुखता से नहीं छपवाया गया। वरिष्ठ नेताओं को कार्यकर्ताओं की नजर में गिराने से क्या पार्टी को लाभ होगा? उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं एक तथाकथित कमजोर कैंडिडेट हार के साथ ही ग्राम कांग्रेस के गठन में जुट गए हैं।
कांग्रेस के पांचों उम्मीदवारों ने संघर्ष किया जिसके लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए थी। वरिष्ठ नेताओं के पास चुनाव न लड़ने के कुछ कारण होंगे, क्या उन्हें भी इसी प्रकार लिक का सहारा लेना चाहिए? जिस समय हम सब केदारनाथ बाबा का आशीर्वाद लेकर चुनावी विजय के लिए कमर कस रहे हैं, पार्टी के आंतरिक सुझावों को इस प्रकार सार्वजनिक करना उचित नहीं है। हरीश रावत की सोशल मीडिया में जारी की गई इस पोस्ट से कांग्रेस में एक बार फिर हड़कंप मचा हुआ है। हरीश रावत ने एक बार फिर पार्टी के अंदर इस प्रकार के विरोधाभास से बचने की नसीहत दी है।












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