उत्तराखंड का सीमांत गांव गंगी, जहां आजाद भारत के 77 साल और प्रदेश बनने के 24 साल बाद पहुंची बिजली, जानिए कहां
Gangi village: उत्तराखंड के एक सीमांत गांव में आजाद भारत के 77 साल और उत्तराखंड बनने के 24 साल बाद बिजली पहुंची है। यह गांव है टिहरी जिले का प्रथम गांव गंगी। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई आरडीएसएस यानी पुनरीक्षित वितरण क्षेत्र योजना के तहत गांव में बिजली आपूर्ति संभव हो पाई है।
कुछ समय पहले गांव में सड़क पहुंची थी। राज्य सरकार के प्रयास से ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। गंगी गांव में अभी तक गांव में सोलर सिस्टम से विद्युत आपूर्ति हो रही थी, लेकिन अब घुत्तू गांव से आगे बिजली की लाइन बिछने से गांव में विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो गया है।

पूर्व में उरेड़ा विभाग ने गांव के लिए लाइन बनानी थी, लेकिन कुछ कारणों से यह कार्य अधूरा ही रह गया। जिसके बाद उर्जा निगम ने गंगी गांव की विद्युत लाइन के लिए 1 करोड़ 2 लाख रूपये स्वीकृत किये। जिसके बाद इस पर काम हुआ। क्षेत्र के विधायक शक्तिलाल शाह ने बताया कि वे 2016 से गांव में बिजली के लिए आंदोलन कर रहे थे। जिसके बाद सांसद से इस प्रोजेक्ट को स्वीकृत कराने के बाद अब गांव में बिजली पहुंच गई है।
बिजली की लाइन, ट्रांसफर आदि सिस्टम चालू होने के बाद विभाग इन दिनों ग्रामीणों को बिजली के नए कनेक्शन जारी कर रहा है। करीब डेढ़ सौ परिवार से अधिक संख्या वाले गंगी में बिजली विभाग ने करीब 50 परिवार को कनेक्शन दे दिया है, जबकि कुछ लोगों के कनेक्शन की प्रक्रिया चल रही है।
हालांकि गांव में पहली बार ग्रिड की बिजली पहुंचने से कम घरों में ही बिजली की फिटिंग हैं, लोग अभी भी सोलर बिजली का उपयोग कर रहे थे, लेकिन बिजली पहुंचने पर अब विभाग लोगों को बिजली की सुरक्षित फिटिंग कर कनेक्शन लेने को जागरूक कर रहा है।
करीब 2700 मीटर की ऊंचाई (समुद्रतल से) पर स्थित गंगी गांव प्रकृति के अनमोल खजाने से कम नहीं है। चारों तरफ घना जंगल और सामने खतलिंग गलेशियर के साथ ही भिलंगना के दर्शन होते हैं, गांव से केदार नाथ जाने को त्रिजुगीनारायण ट्रेकिंग मार्ग और गंगोत्री जाने के लिए सहस् ताल, बेलक बुग्याल ट्रेक जाता है। पहले घुत्तू से यहां पैदल जाते थे, लेकिन अब सड़क बन गई है।












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