पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत की दिल्ली में जेपी नड्डा और राजनाथ सिंह से मुलाकात, उत्तराखंड में गरमाई सियासत
उत्तराखंड के पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की अचानक दिल्ली में सीनियर नेताओं से मुलाकात के बाद प्रदेश में सियासत गरमा गई है। त्रिवेंद्र रावत ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। जिसके बाद सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।

पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत ने लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद त्रिवेंद्र रावत के सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया गया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान ऐतिहासिक G-20 सम्मेलन के सफलतापूर्वक संपन्न होने महिलाओं के सम्मान, उनके सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार द्वारा पारित महिला आरक्षण विधेयक की शुभकामनाएं दीं।
साथ ही इसके अलावा समसामयिक विषयों पर चर्चा व उनका मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इससे पहले वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिले। राजनाथ सिंह से मुलाकात भी खास मायने रखती है। राजनाथ सिंह उत्तराखंड की राजनीति के सबसे करीबी नेताओं में माने जाते हैं। जिनकी शीर्ष नेतृत्व के लिए उत्तराखंड के फैसले लेने में राय काफी अहम मानी जाती है।
बताया गया कि राजनाथ सिंह से मिलकर सैन्यधाम उत्तराखंड से लगती भारत- तिब्बत अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर सेना और ITBP की नेलांग जादुंग, रिमखिम, माणा दर्रा स्थित फॉरवर्ड पोस्ट पर जवानों से भेंट के अपने अनुभवों को साझा किया। त्रिवेंद्र रावत की दिल्ली दौड़ ऐसे समय पर अहम मानी जा रही है जब पार्टी लोकसभा चुनाव को लेकर काफी तेजी से तैयारियों में जुटी है। इस बीच कई चुनावी राज्यों में त्रिवेंद्र की भूमिका अहम रह सकती है।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हैं। इन राज्यों में भी त्रिवेंद्र को कुछ जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। लेकिन जिस तरह से वे दो साल के बाद उत्तराखंड की सियासत में फिर से सक्रिय रहे हैं। उसे त्रिवेंद्र की नई पारी के रुप में देखा जा रहा है। त्रिवेंद्र रावत इस बार खुद लोकसभा चुनाव लड़ने को तैयार नजर आ रहे हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी अध्यक्ष से चुनाव न लड़ने की बात कही थी। जिस वजह से वे विधानसभा चुनाव में सक्रिय नजर नहीं आए। अब लोकसभा चुनाव से पहले त्रिवेंद्र रावत हरिद्वार और गढ़वाल सीट पर लगातार सक्रिय बने हुए हैं। इससे पहले हाईकमान ने उन पर विश्वास जताते हुए बीते दिनों यूपी की पांच लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी। उन्हें महाजनसंपर्क अभियान के लिए पांच लोकसभा सीटों का प्रभारी बनाया गया था।
त्रिवेंद्र सिंह रावत 2017 में उत्तराखंड के सीएम बने। लेकिन 4 साल तक सीएम रहने के बाद मार्च 2021 में उन्हें सीएम की कुर्सी से अचानक हटना पड़ा तो वे कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूर हो गए। केंद्रीय नेतृत्व के अचानक लिए गए फैसले से वे नाराज भी नजर आए। करीब दो साल तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर चलते रहे और सीमावर्ती इलाकों को दौरा करने के साथ ही केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर अपनी बात रखते आए। अब त्रिवेंद्र फिर से एक्टिव नजर आ रहे हैं।












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