उत्तराखंड की राजनीति छोड़कर दिल्ली में सक्रिय होंगे पूर्व सीएम हरीश रावत !, जानिए हरदा के मन की बात
हरीश रावत ने अब देहरादून से दिल्ली की ओर जाने के संकेत दिए
देहरादून, 14 अप्रैल। उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे सीनियर नेता हरीश रावत ने अब देहरादून से दिल्ली की ओर जाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं, कि हरीश रावत अब एक बार फिर केन्द्र की राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं। हालांकि हाईकमान उन्हें क्या कोई जिम्मेदारी देगी या फिर वे एक सक्रिय राजनीतिज्ञ के रूप में काम करेंगे। ये अभी साफ नहीं है।

सोशल मीडिया के जरिए कही मन की बात
पूर्व सीएम और उत्तराखंड कांग्रेस के बड़े चेहरे हरीश रावत एक बार फिर प्रदेश की राजनीति से अलग होने के संकेत दे रहे हैं। इससे पहले 2017 में भी हरीश रावत हार के बाद दिल्ली चले गए थे। इस बार जिस तरह से हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष के चयन में सीनियर नेताओं की अनदेखी की है। उससे सभी नेता नाराज बताए जा रहे हैं। नाराजगी का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमेशा सोशल मीडिया में एक्टिव नजर आने वाले हरीश रावत ने नए प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष को अब तक शुभकामनाएं नहीं दी हैं। इतना ही नहीं जब करन माहरा हरीश रावत से मिलने पहुंचे तो हरीश रावत ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। साफ है कि हरीश रावत ने अब अपने नए कदम उठाने का मन बना लिया है। हरीश रावत ने अपने नए फेसबुक पोस्ट में कहा है कि
मेरा स्वास्थ्य व राजनैतिक स्वास्थ्य, दोनों स्थान परिवर्तन चाह रहे हैं अर्थात उत्तराखण्ड से दिल्ली की ओर प्रस्थान किया जाय। जब भी मैं दिल्ली की सोचता हॅू तो बहुत सारे ऐसे साथी जिन्होंने 1980 के बाद मुझे सहारा दिया और दिल्ली से परिचित करवाया, उनकी याद बराबर आती है। इसमें ऐसे लोग हैं जिन्होंने मुझे प्रवासी बंधुओं का भी प्रियपात्र बनाया और देश के कर्मचारी और श्रमिक संगठनों का भी प्रियपात्र बनाया उनकी मुझे बहुधा याद आती है। उनमें से कुछ अब हमारे बीच हैं, कुछ नहीं हैं।
मन और मस्तिष्क क्या कहता है! और जिधर दोनों एक साथ कहेंगे उस ओर चल पडेंगे....
हरीश रावत ने संगठन को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है। हरीश रावत ने कहा कि ऐसे समय में जब कर्मचारी संगठनों में कांग्रेस का असर निरन्तर घट रहा है। मेरा मन बार-बार कह रहा है देश भर में फैले हुये अपने पुराने साथियों को जो आज भी सक्रिय हैं उन्हें जोड़ू और पुराने संगठन को खड़ा करूं। इसी तरीके से उत्तराखण्ड के प्रवासियों बंधुओं में चाहे कुमाऊं हो या गढ़वाल हो, बहुत सारे लोगों ने मुझे रामलीलाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भी बहुत सारे सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से मुझे, दिल्ली में रह रहे गढ़वाली और कुमाऊंनी भाईयों से जोड़ा। एक समय था, उत्तराखण्ड के प्रवासियों में कांग्रेस का बड़ा दबदबा था, आज वो दबदबा भाजपा और आप का बन गया है। मेरे मन में लालसा है कि एक बार फिर दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड प्रवासियों में कांग्रेस मजबूत करूं। खैर ये विचार हैं, अनंतोगत्वा देखिये मन और मस्तिष्क क्या कहता है! और जिधर दोनों एक साथ कहेंगे उस ओर चल पडेंगे।
सरकार को विपक्ष की तरह जगाने का काम भी
एक तरफ हरीश रावत दिल्ली जाने के संकेत दे रहे हैं, दूसरी तरफ वे प्रदेश के समसामयिक मुद्दों को लेकर लगातार सरकार को विपक्ष की तरह जगाने का काम भी कर रहे हैंं। हरीश रावत ने सरकार के पेंशन को लेकर लिए गए निर्णय पर सवाल उठाए हैं। हरीश रावत ने कहा है कि समाज कल्याण द्वारा संचालित पारिवारिक पेंशन अर्थात वृद्धावस्था पेंशन में पति-पत्नी दोनों को पेंशन के लिए अनुमन्य तो कर दिया गया है। मगर एक नई शर्त जोड़ दी गई है कि उसी वृद्ध को वृद्धावस्था पेंशन मिलेगी, जिनके बच्चे नाबालिग होंगे। हरदा ने सवाल खड़े करते हुए कहा है कि आप सोचें यदि व्यक्ति खुद 60 वर्ष का है या महिला 60 वर्ष की है तो स्वाभाविक रूप से उनके बच्चे 25-30 साल से ऊपर के ही होंगे, तो शर्त का अभिप्राय है कि एक बड़ी संख्या में बुजुर्गों की पेंशन पति-पत्नी, दोनों के लिये अनुमन्य कर दी है इसका ढोल भी पिट जाय और असली देने में संख्या कम हो जाय।












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