पूर्व सीएम हरीश रावत को उत्तराखंड में उपवास से सत्ता की आस, जानिए पूरा मामला
पूर्व सीएम हरीश रावत उत्तराखंड में उपवास रखकर जता रहे विरोध
देहरादून, 5 नवंबर। उत्तराखंड में चुनावी साल में कांग्रेस महंगाई और गन्ना किसानों के मामले में सरकार को घेरने में जुट गई है। पूर्व सीएम और चुनाव अभियान की कमान संभाल रहे हरीश रावत ने दीवाली पर महंगाई और गोवर्धन पूजा पर गन्ना किसानों के समर्थन में उपवास रखकर विरोध दर्ज कराया। हरीश रावत उपवास की राजनीति से उत्तराखंड में सत्ता वापसी की आस जगाए हुए हैं।

लक्सर में किया उपवास और प्रदर्शन
पूर्व सीएम हरीश रावत ने लक्सर चीनी मिल के सामने किसानों के कुछ सवालों को जिनमें धान की खरीद ठीक से न होना, गन्ने का खरीद मूल्य घोषित होने में हो रहे विलंब, पिराई सत्र घोषित करने में हो रहे विलंब और इकबालपुर चीनी के लोगों का बकाया का भुगतान न होने के विरोध में सांकेतिक उपवास और धरना प्रदर्शन किया। हरीश रावत का कहना है कि किसानों के कुछ सवालों को जिनमें धान की खरीद ठीक से न होना, गन्ने का खरीद मूल्य घोषित होने में हो रहे विलंब, पिराई सत्र घोषित करने में हो रहे विलंब और इकबालपुर चीनी के लोगों का बकाया का भुगतान न होना और खाद मिलने में हो रही दिक्कत जैसे मुद्दों को वे आगे लाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान परेशान हैं, खाद नहीं मिल रही है, दाम अलग बढ़ गये हैं, डीजल सहित खेती के सारे इनपुट महंगे हो गए हैं, नई बुवाई का सीजन आ रहा है। मगर किसानों को अभी मालूम नहीं है कि उनका जो गन्ना खड़ा है उसका खरीद मूल्य क्या मिलने जा रहा है? उनको यह भी अभी तक मालूम नहीं है कि पिराई का सत्र कब शुरू होने जा रहा है, ताकि वो आगे मटर या गेहूं बोने की अपनी प्लानिंग को अभी से बना सकें, उधर धान का उनको मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सरकारी खरीद केंद्रों में नमी बताकर उनको वापस कर दिया जा रहा है ताकि वो प्राइवेट बिचौलियों के हाथों में अपना धान बेचने के लिए मजबूर हो जाएं। सरकारी धान खरीद केंद्र मजाक बनकर के रह गए हैं तो ऐसी स्थिति के अंदर मैंने गन्ने का खरीद मूल्य घोषित करो, ये उद्घोष प्रारम्भ किया है और इसी उद्घोष की भावना को लेकर उपवास किया।
दीवाली पर महंगाई को बनाया मुद्दा
दीवाली पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने महंगाई को लेकर उपवास किया। हरीश रावत ने कहा कि मां लक्ष्मी को स्मरण करते हुये उन्होंने अपना मौन उपवास को समाप्त किया। हरीश रावत ने कहा कि यह मौन व्रत उन लोगों को समर्पित है जो महंगाई से त्रस्त हैं, जो अपने परिवार का ठीक से पालन पोषण नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि महंगाई नहीं उनकी खरीदारी की शक्ति को छीन लिया है। महंगा तेल, महंगी गैस, महंगी सब्जियां हर चीज महंगा और लोग कैसे उन्मुक्त भाव से खुशी-खुशी दीपावली का त्यौहार मनाएं, उन्होंने कहा कि मां उन सब लोगों को इतनी सामर्थ्य दो, धन संपदा दो कि उनके जीवन में भी खुशी आ सके। दीवाली पर सरकार ने भले ही पेट्रोल, डीजल के दामों में कमी की हो, लेकिन खाद्य तेल और अन्य जरुरी सामानों के दामों से आम आदमी त्रस्त है। ऐसे में कांग्रेस को हिमाचल उपचुनाव के रिजल्ट आगामी चुनाव में बूस्टर करने में मददगार साबित हो सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस महंगाई के मुद्दे को चुनाव में जोर-शोर से उठा रही है।
पीएम के दौरे को लेकर उठाए सवाल
पीएम नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे को लेकर भी पूर्व सीएम हरीश रावत ने बयान जारी किया है कि हरीश रावत ने कहा कि पीएम के दौर से वे निराश हैं, क्योंकि पीएम ने उत्तराखंड व आपदा पीड़ित उत्तराखंड के लिए और केदार क्षेत्र के भविष्य की योजनाओं के विषय में कोई स्वीकृतियां नहीं दी, कोई धन देने की घोषणा नहीं की।
हरीश रावत ने आरोप लगाते हुए कहा है कि
पीएम हमारी परंपराओं व मान्यताओं को रौंदकर के चले गये, बड़े-बड़े नेता आए, महामहिम राष्ट्रपति भी आये, इंदिरा गांधी भी आयी, राहुल गांधी पैदल चलकर के आये, मुख्यमंत्री तो आते रहे हैं, मैं मुख्यमंत्री के तौर पर कई बार केदारनाथ गया, हर बार गर्भगृह में भगवान केदारनाथ जी के सामने ध्यानस्थ भी रहा, लेकिन हमको उस क्षण की फोटो खींचने और लाइव प्रसारित करने की हिम्मत नहीं आयी। रावल और केदारनाथ मंदिर समिति ने जो लक्ष्मण रेखा खींची थी, हमने हमेशा उसका आदर किया, सबने उसका आदर किया। लेकिन इस बार गर्भगृह से प्रधानमंत्री ने अपने को लाइव प्रसारित करवाया, फेसबुक लाइव व आज तक और दूसरे चैनलों में यह सब कुछ टेलीकास्ट हुआ। मंदिर के प्रांगण से राजनैतिक उद्देश्य को लेकर भाषण किया गया और उसको सरकारी संचार माध्यमों से प्रसारित किया गया।












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