flashback 2022: सीएम पुष्कर सिंह धामी के 3 धाकड़ फैसले, जो इतिहास के पन्नों में होंगे दर्ज

उत्तराखंड के लिहाज से 2022 में लिए गए सीएम धामी के 3 बड़े फैसले इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए हैं। यूनिफार्म सिविल कोड, धर्मांतरण कानून, महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है।

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साल 2022 उत्तराखंड की राजनीति के लिहाज से खास रहा। जहां भाजपा ने मिथक तोड़ते हुए पहली बार सरकार रिपीट की तो वहीं मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी सीएम की कुर्सी पाने में सफल रहे। इसके बाद चंपावत सीट पर उपचुनाव में सीएम धामी ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की। सीएम धामी के चुनाव प्रचार में धाकड़ धामी का नारा दिया गया। जिसे सीएम धामी ने अपने एक साल से भी कम समय के कार्यकाल में बड़े फैसले लेकर साबित कर दिया।

यूनिफार्म सिविल कोड

यूनिफार्म सिविल कोड

उत्तराखंड के लिहाज से 2022 में लिए गए धामी के 3 बड़े फैसले इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए हैं। सबसे पहला समान नागरिक संहिता कानून (यूनिफार्म सिविल कोड) लागू करने की दिशा में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने की तरफ कदम बड़ा रहा है। सीएम धामी ने चुनाव जीतते ही सबसे पहले चुनाव के दौरान किए गए वादे को पूरा का यूनिफार्म सिविल कोड को लागू करने का ऐलान किया। इसके लिए सीएम धामी ने कमेटी का भी गठन किया। सरकार ने ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई, जिसमें अध्‍यक्ष सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्‍त न्‍यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई, चार अन्‍य सदस्‍यों में दिल्‍ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्‍त न्‍यायाधीश प्रमोद कोहली, राज्‍य के पूर्व मुख्‍य सचिव शत्रुघ्‍न सिंह के अलावा टैक्स पेयर एसोसिएशन के मनु गौर और शिक्षाविद सुरेखा डंगवाल को शामिल किया गया। समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार कर रही विशेषज्ञों की समिति का कार्यकाल अगले साल 27 मई तक बढ़ाया गया है। सीएम धामी ने ऐलान किया है कि ड्राफ्ट तैयार होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। जिसमें 6 माह का समय लग सकता है।

यूपी से भी सख्त धर्मांतरण कानून

यूपी से भी सख्त धर्मांतरण कानून

उत्तराखंड की धामी सरकार यूपी से भी सख्त धर्मांतरण कानून लाई है। जो कि दूसरे राज्यों से सख्त कानून बनाने की दिशा में सरकार का कदम है। धामी सरकार ने विधानसभा में बहुत ही सख्त धर्मांतरण-विरोधी विधेयक पेश किया। इसमें गैर-कानूनी तरीके से होने वाले धर्मांतरण को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर कम से कम तीन साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022 में कैद की सजा के अलावा दोषियों पर कम से कम 50,000 रुपए जुर्माने का भी प्रावधान रखा है।

नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण

नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण

आधी आबादी को बड़ी सौगात देते हुए धामी सरकार ने राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने जा रही है। जो कि ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। उच्च न्यायालय में शासनादेशों पर रोक के बाद से महिला क्षैतिज आरक्षण को लेकर संशय बन गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद शासन ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। कोर्ट से स्थगन आदेश लेने के साथ ही अधिनियम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। 30 नवंबर को सरकार ने विधानसभा में इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कराया। विधानसभा में सरकार ने उत्तराखंड लोक सेवा (महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण) विधेयक पेश किया। जिसके बाद इसे राजभवन भेजा गया। महिला अभ्यर्थियों को राज्य सरकार की नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी अधिकार बहुत जल्द मिलने वाला है। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा।

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