Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

फ्लैशबैक— 2021, उत्तराखंड की जिन अहम सख्सियतों ने दुनिया को कहा अलविदा

2021 में उत्‍तराखंड ने खोई कई अ‍हम हस्तियां

देहरादून, 29 दिसंबर। नए साल 2022 को लेकर काउंडाउन भी शुरू हो गया है। ऐसे में 2021 की यादें और घटनाओं को भी लोग याद कर रहे हैं। उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड ने 2021 में कई अहम सख्सियतों को खोया है। उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाले चिपको आंदोलन के प्रणेता और प्रख्‍यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा, नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस की नेता इंदिरा ह्रदयेश, भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, 8 बार के विधायक हरंबस कपूर ने 2021 में दुनिया को अलविदा कहा है।

 Flashback - 2021, the important personalities of Uttarakhand who said goodbye to the world

चिपको आंदोलन के प्रणेता और प्रख्‍यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा

चिपको आंदोलन के प्रणेता और प्रख्‍यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का 21 मई 2021 को निधन हुआ। उन्‍होंने ऋषिकेश स्थित एम्‍स में अंतिम सांस ली। कोरोना समेत अन्‍य बीमारियों से ग्रसित होने के कारण उन्‍हें 8 मई को एम्‍स में भर्ती कराया गया था। 'पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। नौ जनवरी, 1927 को टिहरी जिले में जन्मे बहुगुणा को चिपको आंदोलन का प्रणेता माना जाता है। उन्होंने सत्तर के दशक में गौरा देवी और कई अन्य लोगों के साथ मिलकर जंगल बचाने के लिए चिपको आंदोलन की शुरूआत की थी। टिहरी बांध के निर्माण के आखिरी चरण तक उनका विरोध जारी रहा। महात्मा गांधी के अनुयायी रहे बहुगुणा ने हिमालय और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए कई बार पदयात्राएं कीं।

उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश

उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश का 13 जून को निधन हो गया है। कांग्रेस संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए ह्रदयेश नई दिल्ली गई हुई थीं। वहां उत्तराखंड सदन में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश की उम्र 80 साल की थी। वह उत्तराखंड की राजनीति में आयरन लेडी के नाम से प्रसिद्ध थीं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत उत्तर प्रदेश से की और नेता प्रतिपक्ष के रूप में समाप्त की। सात अप्रैल 1941 को अयोध्या, उप्र में जन्मीं डा. इंदिरा हृदयेश पेशे से शिक्षिका थीं। हिंदी व राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री के अलावा इन्होनें बीएड व पीएचडी कर अध्यापन कार्य शुरू किया। वर्ष 1974 में सयुंक्त प्रांत में इंदिरा पहली बार उप्र विधान परिषद की सदस्य निर्वाचित हुईं। वर्ष 1986, 1992,1998 में उप्र विधान परिषद की सदस्य निर्वाचित हुईं। साथ ही वर्ष 2002, 2012 व 2017 के आम चुनावों में उत्तराखंड के विधान सभा की सदस्या निर्वाचित हुईं।

सीडीएस बिपिन रावत
8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में भारतीय वायुसेना के एमआई-17 वी फाइव हेलीकॉप्टर में सवार चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत व उनकी पत्नी मधुलिका रावत की दर्दनाक मौत हो गई है। हेलीकाप्टर हादसे में सीडीएस बिपिन रावत व उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 13 लोगों की मौत हुई। सीडीएस बिपिन रावत उत्तराखंड के ही थे। रावत पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लॉक के सैंण गांव के मूल निवासी थे। देहरादून में जनरल बिपिन रावत का घर भी बन रहा था। जनरल बिपिन रावत थलसेना के प्रमुख रहे। रिटायरमेंट से एक दिन पहले बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बनाया गया था। इनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत सेना से लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रावत ने 11वीं गोरखा राइफल की पांचवीं बटालियन से 1978 में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने देहरादून में कैंब्रियन हॉल स्कूल, शिमला में सेंट एडवर्ड स्कूल और भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से शिक्षा ली। आईएमए में उन्हें सर्वश्रेष्ठ स्वोर्ड ऑफ ऑनर सम्मान से भी नवाजा गया था।

भाजपा विधायक हरबंस कपूर

देहरादून के कैंट क्षेत्र से भाजपा विधायक हरबंस कपूर का 13 दिसंबर को निधन हो गया है। वह 75 साल के थे। कपूर लगातार आठ बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष पद का भार भी संभाला था। भाजपा विधायक हरबंस कपूर के नाम लगातार एक क्षेत्र से आठ बार विधायक रहने का अनूठा रिकॉर्ड है। उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, गुलाब सिंह और हरबंस कपूर आठ बार विधायक रहे हैं। प्रदेश में भाजपा को स्थापित करने में उनका बेहद अहम योगदान रहा है। 2007 में दूसरे विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में बीजेपी की पहली निर्वाचित सरकार बनी तो हरबंस विधानसभा अध्यक्ष चुने गए। उन्हें 1985 में पहली बार विधानसभा चुनाव में हार मिली। इसके बाद से कपूर कभी विधानसभा चुनाव नहीं हारे।


More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+