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फ्लैशबैक 2021 : 1 साल में 3 मुख्यमंत्री बनने का बना नया रिकॉर्ड, टीएसआर 1, टीएसआर 2 और अब धामी की सरकार

2021 में उत्‍तराखंड में बना नया रिकॉर्ड, 1 साल में बदले 3 सीएम के चेहरे

देहरादून, 20 दिसंबर। नए साल 2022 का काउंडाउन शुरू हो गया है। ऐसे में 2021 को आने वाले समय में कुछ खास घटनाओं के लिए याद किया जाएगा। उत्तराखंड में सियासत की बात करें तो 21 साल के इतिहास में 1 साल के भीतर भाजपा ने 3 चेहरे मुख्यमंत्री के तौर पर उत्तराखंड को दिए। ऐसे में 2021 को उत्तराखंड के इतिहास में सीएम बदलने को लेकर जरुर याद किया जाएगा। त्रिवेंद्र सिंह रावत यानि टीएसआर की सरकार 4 साल के कार्यकाल पूरा करने से पहले ही बदल गई, जब दूसरे चेहरे के रुप में नए टीएसआर ​तीरथ सिंह रावत को जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन 4 माह के अंदर ही भाजपा ने युवा मुख्यमंत्री के तौर पर पुष्कर सिंह धामी को कुर्सी सौंपी। जो कि 5 माह का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। इस तरह भाजपा ने एक साल में 3 मुख्यमंत्री बदल कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। जो कि उत्तराखंड के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।

4 साल से पहले ही हटाई त्रिवेंद्र सरकार

4 साल से पहले ही हटाई त्रिवेंद्र सरकार

2017 में उत्तराखंड की चतुर्थ विधानसभा के लिए चुनाव हुए तो भाजपा की 70 विधानसभा सीटों में से 57 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत की सरकार बन गई। प्रचंड बहुमत की सरकार चलाने के लिए हाईकमान ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को चुना। त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार में कई बड़े फैसले हुए तो देवस्थानम और भू कानून के मुद्दे ने भाजपा की जमकर किरकिरी कराई। प्रचंड बहुमत की सरकार में विधायकों ने आरोप लगाया कि विधायकों की बातों को अनसुना कर किचन कैबिनेट के जरिए फैसले लिए जा रहे हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी सरकार के 4 साल के कार्यकाल को मनाने की तैयारी करने में जुटे थे, कि तभी दिल्ली से हाईकमान का संदेश आ गया। गैरसेंण में चल रहे सत्र को बीच में ही रोककर दिल्ली की दौड़ शुरू हुई। त्रिवेंद्र दिल्ली से लौटे और देहरादून आकर इस्तीफा सौंप दिया। 17 मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले थे लेकिन 8 दिन पहले ही 9 मार्च को उन्होंने पद छोड़ दिया। कारण पूछा गया तो त्रिवेंद्र ने जवाब दिया कि इसका जवाब लेने के लिए मीडिया को दिल्ली जाना पड़ेगा।

4 माह में हटा दिए गए तीरथ सिंह रावत

4 माह में हटा दिए गए तीरथ सिंह रावत

इसके बाद गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत को जिम्मा सौंपा गया। भाजपा हाईकमान ने ये संदेश देने की कोशिश की कि टीएसआर की जगह टीएसआर को ही लाया गया है। ऐसे में जातिवाद को भी बेलेंस करने का दावा किया गया। तीरथ सिंह रावत के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी ​हरिद्वार का कुंभ। इस दौरान तीरथ सिंह रावत सरकार 4 माह का कार्यकाल पूरा करने ही वाली थी कि जुलाई में दिल्ली से अचानक विधानमंडल दल की बैठक बुलाने का फरमान आ गया। भाजपा के नेताओं और विधायकों की और से दावा किया गया कि संवैधानिक संकट आ सकता है, ऐसे में तीरथ सिंह रावत को कुर्सी छोड़नी पड़ी। हालांकि संवैधानिक संकट की बात ​प्रदेश में किसी को भी समझ में नहीं आया। ये बात अलग है कि तीरथ सिंह रावत के विवादित बयान और कुंभ में फर्जी टेस्टिंग घोटाले को लेकर भाजपा को जवाब देना मुश्किल पड़ गया था।

चुनाव से पहले धामी को मिली कुर्सी

चुनाव से पहले धामी को मिली कुर्सी

तीरथ सिंह के इस्तीफ के बाद अचानक से खटीमा के विधायक पुष्कर सिंह धामी का नाम नए मुख्यमंत्री के तौर पर सामने आया। धामी का नाम सामने आते ही सभी चौंक गए। धामी ने अब तक किसी बड़ी जिम्मेदारी को नहीं संभाला था। ऐसे में सवाल खड़े होने लाजिमी थी। भाजपा ने कहा कि युवा सीएम और युवा सरकार युवा उत्तराखंड में विकास करेगी। 4 मार्च को पुष्कर सिंह धामी 21 साल के उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री बन गए। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आने लगे धामी के चेहरे पर हाईकमान ने मुहर लगा दी। साफ हो गया कि 2022 का विधानसभा चुनाव अब पुष्कर सिंह धामी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। युवा सीएम पुष्कर सिंह धामी अपने केन्द्रीय नेतृत्च की नजर में अपनी 5 माह की पारी में बेटिंग और गेंदबाजी भले ही शानदार कर रहे हों। लेकिन एक नया रिकॉर्ड भाजपा ने बना दिया। जो कि एक साल में 3 मुख्यमंत्री के चेहरे देने के रूप में दर्ज हो गया है।

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