9 साल बाद स्थाई मंदिर में विराजमान हुई धारी देवी, मंदिर से हटाते ही केदारनाथ में आई थी जलप्रलय

शनिवार सुबह मां धारी देवी को अस्थाई मंदिर से स्थाई मंदिर में विराजित कर दिया है। इस दौरान सुबह से ही मंदिर में विशेष पूजा अर्चना और हवन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।अब मां धारी देवी के दर्शन नए भव्य मंदिर में होंगे।

Dhari Devi enshrined permanent temple 9 years deluge came Kedarnath considered protector settled

9 साल के लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड की रक्षक मानी जानी वाली धारी देवी आखिरकार अपने मंदिर में विराजमान हो गई है। 2013 में 16 जून की शाम मां धारी की प्रतिमा को प्राचीन मंदिर से हटा दिया गया था। जिसके बाद धारी देवी के मंदिर को भव्य रुप दिया गया है।

धारी देवी के दर्शन नए भव्य मंदिर में होंगे

शनिवार सुबह मां धारी देवी को अस्थाई मंदिर से स्थाई मंदिर में विराजित कर दिया है। इस दौरान सुबह से ही मंदिर में विशेष पूजा अर्चना और हवन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। पूजा में श्रीनगर विधायक धन सिंह रावत समेत पुजारी और कई श्रद्धालु मौजूद रहे। मंत्रोच्चार और पूरे विधि विधान से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। बाद में भंडारे के साथ ही भक्तों ने दर्शन किए। अब मां धारी देवी के दर्शन नए भव्य मंदिर में होंगे। उत्तराखंड की रक्षक कही जानी वाली सिद्धपीठ धारी देवी का मंदिर श्रीनगर से करीब 13 किलोमीटर दूर अलकनंदा नदी किनारे स्थित है। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के निर्माण के चलते यह क्षेत्र डूब क्षेत्र में आया तो इसी स्थान पर परियोजना संचालन कर रही कंपनी की ओर से पिलर खड़े कर मंदिर का निर्माण कराया जा रहा था लेकिन जून 2013 में केदारनाथ जलप्रलय के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से प्रतिमाओं को अपलिफ्ट कर दिया गया।

चार साल पूर्व पर्वतीय शैली में आकर्षक मंदिर का निर्माण

पिछले नौ साल से प्रतिमाएं इसी अस्थायी स्थान में विराजमान हैं। लगभग चार साल पूर्व कंपनी की ओर से इसी के समीप नदी तल से करीब 30 मीटर ऊपर पिलर पर पर्वतीय शैली में आकर्षक मंदिर का निर्माण करा दिया गया, लेकिन शुभ मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा था। जो​ कि मंदिर के पुजारियों ने आज 28 जनवरी की सुबह शुभ मुहूर्त तय किया। जब मां धारी देवी, भैरवनाथ और नंदी की प्रतिमाएं अस्थायी परिसर से नवनिर्मित मंदिर परिसर में स्थापित की गई। धारी देवी का मंदिर जब यहां से अपलिफ्ट कराया जा रहा था तो केदारनाथ में जलप्रलय आया तब से मां धारी देवी की शक्ति और भक्ति को लेकर सभी मां के मंदिर में माथा टेकने जरुर आते हैं। इनका नाम धारण करने वाली देवी के नाम से ही धारी देवी पड़ा। धारी देवी का एक और चमत्कार माना जाता है। जिसका स्वरूप दिन में तीन बार बदलता है। प्रतिमा सुबह एक बच्चे के समान, दोपहर में युवा स्त्री की झलक और शाम होते-होते प्रतिमा बुजुर्ग महिला जैसा रूप धर लेती है।

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