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Uttarakhand: दो माह में सड़क हादसों और आपदाओं ने सिस्टम के सामने खड़ी की चुनौती, UDAS की रिपोर्ट से उठे सवाल

उत्तराखंड में सड़क हादसों और आपदाओं को लेकर UDAS की नवम्बर महीने की रिपोर्ट बताती है कि इस महीने राज्य में बड़ी सड़क दुर्घटनाओं में 12 लोगों की मौत हुई है। साथ ही 3 बार आये भूकम्पों ने भी सबको चेताने का काम किया।

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उत्तराखंड में बीते दो माह में सड़क हादसों और आपदाओं ने एक बार फिर सिस्टम के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। साल 2022 को अलविदा कहने और नए साल 2023 के आने का काउंडाउन शुरू हो गया है। लेकिन ये साल जाते जाते कई परिवारों को न भूला देने वाला जख्म दे गया है। देहरादून स्थित थिंक टैंक एसडीसी फाउंडेशन हर महीने उत्तराखंड में आने वाली प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं पर रिपोर्ट जारी कर रहा है। जिसमें नवंबर माह की रिपोर्ट ने एक बार फिर सिस्टम पर सवाल खड़े करने का काम किया है।

प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं पर रिपोर्ट जारी

एसडीसी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल के अनुसार इस रिपोर्ट में राज्य में पूरे महीने आने वाली प्रमुख आपदाओं और दुर्घटनाओं का डॉक्यूमेंटेशन किया जा रहा है। नवम्बर 2022 में उत्तराखंड में आई प्रमुख आपदाओं और दुर्घटनाओं का ब्योरा दिया गया है। एसडीसी फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि इस रिपोर्ट में राज्य में बड़ी दुर्घटनाओं को ही शामिल किया जा रहा है। नवम्बर महीने की रिपोर्ट बताती है कि इस महीने राज्य में बड़ी सड़क दुर्घटनाओं में 12 लोगों की मौत हुई है। नवम्बर के महीने में एक बड़ी सड़क दुर्घटना चमोली जिले में हुई। 18 नवम्बर को जोशीमठ के पास डुमक मार्ग पर पल्ला जखोल के पास हुए इस हादसे में एक टाटा सूमो वाहन करीब 700 मीटर गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में 12 लोगों की मौत हुई। इस टाटा सूमो वाहन में 16 लोग सवार थे। यह संख्या इस वाहन की क्षमता से करीब दोगुनी थी। मरने वालों में दो महिलाएं भी शामिल थी।

भूकम्पों ने भी सबको चेताने का काम किया

इसके साथ ही नवम्बर में आये भूकम्पों ने भी सबको चेताने का काम किया है। रिपोर्ट के अनुसार 6 नवम्बर को राज्य के कई हिस्सों में भूकंप का झटका महसूस किया गया। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मैग्नीट्यूड थी और भूकम्प का केन्द्र उत्तरकाशी से 17 किमी दूर उत्तर-पूर्व में था। 9 नवम्बर को एक बार फिर राज्य में भूकम्प का झटका महसूस किया गया। इस भूकम्प की तीव्रता 4.3 मैग्नीट्यूट मापी गई। भूकम्प का केन्द्र पिथौरागढ़ में था। 12 नवम्बर को भूकंप का सबसे तेज झटका महसूस किया गया। इस भूकम्प की तीव्रता 5.4 मैग्नीट्यूड थी और भूकम्प का केन्द्र नेपाल में था।

अक्टूबर में 4 बड़ी आपदाओं और दुर्घटनाएं हुई जिनमें 74 लोगों की मौत

एसडीसी फाउंडेशन ने अक्टूबर 2022 की पहली उदास/UDAS मंथली रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य में इस वर्ष अक्टूबर में 4 बड़ी आपदाओं और दुर्घटनाएं हुई जिनमें 74 लोगों की मौत हुई। 4 अक्टूबर का दिन राज्य के लिए सबसे ज्यादा बुरा साबित हुआ। इस दिन उत्तरकाशी जिले में द्रोपदी का डांडा-2 चोटी पर हिमस्खलन के कारण पर्वतारोहण कर रहे निम के 29 पर्वतारोहियों की मौत हुई। 4 अक्टूबर को ही पौड़ी जिले के बीरोंखाल के पास बरातियों को ले जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त हुई। इसमें 34 लोगों की मौत हुई। 18 अक्टूबर को रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटना में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि 22 अक्टूबर को चमोली जिले के पैनगढ़ में भूस्खलन से मकान दबने के कारण 4 लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट के अनुसार 1 अक्टूबर को केदारनाथ क्षेत्र में चौराबाड़ी के आसपास एक बड़ा हिमस्खलन हुआ। हालांकि यह हिमस्खलन केदारनाथ तक नहीं पहुंचा, लेकिन ऐसे हिमस्खलन कई बार बड़े हादसे का कारण बनते हैं। इसके अलावा दो अक्टूबर को राज्य में 2.5 मैग्नीट्यूट तीव्रता का भूकंप दर्ज किया है, जिसका केन्द्र उत्तरकाशी जिले में भटवाड़ी तहसील के बाड़ाहाट रेंज में था।

आपदा प्रबंधन के लिए ओडिशा मॉडल से सीख लेने की ज़रूरत
संस्था के फाउंडर अनूप नौटियाल का कहना है कि उत्तराखंड आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है और अपने अध्ययनों के आधार पर वैज्ञानिक यहां भूस्खलन, भूकंप आने की आशंका लगातार जताते रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में विशेष तौर पर आपदा तंत्र को मजबूत करने की सख्त जरूरत है। अनूप नौटियाल ने कहा की उत्तराखंड को आपदा प्रबंधन के लिए ओडिशा मॉडल से सीख लेने की ज़रूरत है। ओडिशा मॉडल की सराहना यूनाइटेड नेशंस ने भी की हैं। आपदा जोखिम शासन को मजबूत करने, तैयारियों और परिदृश्य योजना में निवेश करने और आपदा जोखिम की अधिक समझ फैलाने पर ओडिशा मॉडल महत्वपूर्ण सबक देता है।ओडिशा मे 1999 के चक्रवात मे लगभग 10,000 लोग मारे गए और यह कभी दोहराया नहीं गया है।

दिसंबर माह 6​ दिनों में 8 लोगों ने जान गंवाई
दिसंबर माह की शुरूआत बुरी खबरों से हुई है। एक तरफ कई परिवार शादियों के सीजन में खुशियां बटोरने की कोशिश कर रहे थे तो दूसरी तरफ कई ​परिवारों की खुशियां चंद मिनटों में मातम में बदल गई। सबसे दर्दनाक हादसा 3 दिसंबर को अल्मोड़ा के भैंसियाछाना ब्लॉक के जमराडी बखरिया नामक स्थान पर हुई। जहां बारात लेकर लौट रही कार के खाई में गिरने से दूल्हे के पिता, दीदी, भाभी, भतीजे कुल चार लोगों की मौके पर मौत हो गई। जबकि तीन लोग गंभीर घायल हो गए। 5 दिसंबर को सामने आए दो सड़क हादसों पौड़ी और चमोली में दो महिलाओं समेत 4 लोगों की मौत हो गई। इस तरह से 6​ दिनों में 8 लोगों ने जान गंवाई है।

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