देहरादून में फर्जी अधिकारी चढ़ा पुलिस के हत्थे,मोबाइल पर ऐसे तैयार करता था ज्वाइनिंग लेटर,सुनकर रह जाएंगे दंग
देहरादून पुलिस के हत्थे राज्य सम्पत्ति विभाग का फर्जी अधिकारी चढ़ा है। जो कि फर्जी तरीके से कागज तैयार कर लोगों को नौकरी के कागज उपलब्ध कराता था। आरोपी ने देहरादून के सहस्त्रधारा रोड निवासी एक युवती के पिता से जिलाधिकारी देहरादून कार्यालय में नौकरी दिलाने के नाम पर 20 हजार रूपए लिए और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर पकड़ा दिया।

जब पुलिस ने आरोपी को पकड़ा तो उसने बताया कि उसने अपने मोबाइल पर Picsart और Pixelleb नाम से 02 एप डाउनलोड किये गये थे, जिनकी सहायता से वह नाम परिवर्तन कर पहचान पत्र तथा सरकारी आदेशों पर एडिटिंग कर हस्ताक्षर व मोहर स्कैन कर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी के बाद एक साथ कई मामले की सच्चाई सामने आई है। पुलिस ने 34 वर्षीय पौड़ी गढवाल निवासी संजय कुमार को अरेस्ट किया है।
पूछताछ में आरोपी संजय कुमार द्वारा बताया गया कि वह बी0ए0 पास है। वह कचहरी में नैना फोटो स्टेट के नाम से एक दुकान मे नोटरी व अटैस्टेड का काम करता है। वही पर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों में अलग-अलग पद की अवनीत भट्ट के नाम से फर्जी पहचान पत्र और अवनीत भट्ट व संजय कुमार के नाम से अलग-अलग आधार कार्ड बनाये गये, जिससे उसने समाज कल्याण विभाग में पेन्शन, वृद्धावस्था पेंशन, आर्थिक योजना तथा श्रम विभाग में लोन का पैसा सेटेलमेन्ट का झांसा देकर कई लोगों से पैसों की ठगी की गयी।
कचहरी परिसर में काम करने के दौरान उसकी मुलाकात प्रिया नाम की एक युवती से हुई, जिसका आरोपी ने समाज कल्याण विभाग में आर्थिक योजना का आवेदन पत्र भरा था, जिसका उसको लाभ मिला। इसके जरिए उसकी मुलाकात जगदीश मुयाल से हुई , जिनसे आरोपी ने उनकी बेटी की नौकरी लगाने की एवज में 20 हजार रू0 अपने परिचत के खाते में डलवाये और उनकी पुत्री के शैक्षणिक व अन्य दस्तावेज प्राप्त करते हुए कुछ समय बाद उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय में नियुक्ति का फर्जी नियुक्ति पत्र दिया।
आरोपी ने शिवानी मुयाल का फर्जी ज्वॉइनिंग लैटर तैयार कर उस पर जिलाधिकारी देहरादून के हस्ताक्षर स्कैन कर फर्जी नियुक्ति पत्र बनाया गया था। लेकिन जब वे नियुक्ति पत्र लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे तो सारा भेद खुल गया। अभियुक्त के कब्जे से पुलिस टीम द्वारा अलग-अलग विभागों के फर्जी पहचान पत्र व अन्य दस्तावेज बरामद किये गये।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कृष्णा एक्लेव आमवाला तरला सहस्त्रधारा रोड़ निवासी जगदीश सिंह ने कंप्लेन दर्ज कराई कि उनकी पड़ोस मे रहने वाले एक व्यक्ति के माध्यम से उनकी पहचान अवनीश भट्ट नाम के एक व्यक्ति से हुई। अवनीश भट्ट द्वारा अपना पहचान पत्र दिखाते हुए खुद को उत्तराखण्ड सचिवालय में राज्य सम्पत्ति विभाग में वर्ग-2 का अधिकारी बताया था।
पीड़ित की पुत्री शिवानी ने बीबीए किया था, उसकी नौकरी के सम्बन्ध में अवनीश भट्ट से बात करने पर उसने जिलाधिकारी कार्यालय देहरादून में डाटा ऑपरेटर के पद पर उसकी नियुक्ति लगवाने की बात कही और उसके लिये आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के एवज में उनसे 20 हजार रू0 की मांग की गयी, जो पीड़ित ने आरोपी को गूगल पे के माध्यम से ट्रांसफर किये गये।
इसके बाद उन्होंने आवश्यक प्रमाण पत्र भी अवनीश भट्ट को दिये। एक सप्ताह बाद अवनीश भट्ट ने पीड़ित की बेटी को एक नियुक्ति पत्र दिया जो जिलाधिकारी कार्यालय से जारी किया गया था। नियुक्ति पत्र को लेकर जब पीडिता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे तो कार्यालय के माध्यम से उन्हें ज्ञात हुआ कि उक्त नियुक्ति पत्र फर्जी है। जिसके बाद उन्हें फर्जीवाड़ा का पता चला।












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