Dehradun news: 5वीं पास मास्टरमाइंड, 10वीं और 12वीं के बेच रहा था सर्टिफिकेट, बिहार समेत कई राज्यों में सक्रिय
गैंग बिहार और अरुणाचल प्रदेश में भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट को तैयार करता था। गिरोह एक सर्टिफिकेट के एवज में 15 हजार रुपए वसूलते थे।

देहरादून पुलिस ने फर्जी मार्कशीट व शैक्षणिक दस्तावेज बनाकर कमाई करने वाली गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर कब्जे से फर्जी मार्कशीट व दस्तावेज बरामद किए हैं। आरोपी 5वीं पास है।
गैंग बिहार और अरुणाचल प्रदेश में भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट को तैयार करता था। गिरोह एक सर्टिफिकेट के एवज में 15 हजार रुपए वसूलते थे।
फर्जी मार्कशीट व शैक्षणिक दस्तावेज बनाकर लोगो से पैसा वसूल कर रहे
एसएसपी दलीप कुंवर ने बताया कि थाना कोतवाली नगर व स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप देहरादून को सयुक्त रूप से सूचना मिली कि एमडीडीए कंपलेक्स में स्थित एक दुकान पर कुछ लोग फर्जी मार्कशीट व शैक्षणिक दस्तावेज बनाकर लोगो से पैसा वसूल कर रहे हैं। सूचना पर पुलिस आश्रय फाउंडेशन के ऑफिस में पहुचें, जहां पर एक व्यक्ति मौजूद मिला, जिससे पूछताछ करने पर उसने अपना नाम राज किशोर राय मिला, जिसके पास राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान परिषद के सीनियर सैकैण्डरी स्कूल एग्जामिनेशन व सैकैण्डरी स्कूल एग्जामिनेशन के प्रमाण पत्र रखे मिले। पूछताछ में साथी सहेंद्र पाल, जो कि खतौली मुज्जफरनगर का रहने वाला है, के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान परिषद के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों का रजिस्ट्रेशन कर उनको सीनियर सैकैण्डरी स्कूल एग्जामिनेशन व सैकैण्डरी स्कूल एग्जामिनेशन की अंक तालिका प्रमाण पत्र व अन्य फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र बनाकर देता हूं, जिसके एवज में मैं छात्रों से रुपए लेता हूं, फर्जी सर्टिफिकेट से प्राप्त रुपयों को व सहेंद्र पाल के साथ आपस में बांट लेते हैं। मौके से अभियुक्त को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से प्राप्त फर्जी दस्तावेजों को कब्जे पुलिस लिया गया।
नेशनल काउंसिल फॉर रिसर्च इन एजुकेशन के नाम से एक ट्रस्ट
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार राज किशोर राय, इन्दु व सहेंद्र पाल के साथ मिलकर एक नेशनल काउंसिल फॉर रिसर्च इन एजुकेशन के नाम से एक ट्रस्ट बनाया और उसे पंजीकृत कराया। साथ ही उक्त ट्रस्ट के नाम से एक वेबसाइट बनाई गई, जिसमें 10वीं व 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा करवाने व उसके पश्चात मार्कशीट प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जाने के संबंध में अलग-अलग माध्यम से प्रचार-प्रसार किया गया। जिस पर अलग-अलग राज्यों से युवकों द्वारा रजिस्ट्रेशन करवाया गया। आरोपियों द्वारा कुछ विद्यार्थियों को लिंक भेज कर फर्जी परीक्षाएं भी कराई जाती थी और उन्हें उपरोक्त फर्जी संस्थान की मार्कशीट व प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जाते थे और कुछ अभ्यर्थियों को बिना परीक्षा के भी बेक डेट की भी मार्कशीट , प्रमाण पत्र, माइग्रेशन प्रमाण पत्र व अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र 6 हजार से 8 हजार रुपये लेकर दिए जाते थे।












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