'आपदा में अवसर' तलाश रहे विपक्ष को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दिया झटका, आपदा मानकों में किए ये बदलाव

'आपदा में अवसर' तलाश रहे विपक्ष को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दिया झटका

देहरादून, 26 अक्टूबर। उत्तराखंड में आई आपदा को लेकर एक बार फिर जमकर राजनीति हो रही है। विपक्ष आपदा प्रबंधन में सरकार को फेल बता रही तो भाजपा कांग्रेस पर आपदा में राजनीति का अवसर तलाशने का आरोप लगा रही है। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा मानकों में बदलाव कर विपक्ष की चुनावी साल में आपदा में राहत और बचाव कार्य को मुद्दा बना रही कांग्रेस को करारा झटका दिया है।

पुनर्निर्माण व राहत कार्यों की मॉनिटरिंग के लिये हाईपावर कमेटी बनाई

पुनर्निर्माण व राहत कार्यों की मॉनिटरिंग के लिये हाईपावर कमेटी बनाई

2013 में केदारनाथ में आई आपदा के बाद एक बार उत्तराखंड आपदा की चपेट में हैं। जिसके चलते राज्य सरकार के सामने एक बार फिर बड़ी चुनौती सामने हैं। ऐसे में एक बार फिर विपक्षी कांग्रेस आपदा के राहत कार्यों और बचाव को नाकाफी इंतजाम बता रही है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने सरकार के सिस्टम और आपदा प्रबंधन तंत्र को फेल बताया है। विपक्ष के आरोपों का जबाव देने के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आपदा मानकों में परिवर्तन कर विपक्ष को करारा जबाव दिया है। सीएम ने आपदा प्रभावितों को विभिन्न मदों में दी जा रही सहायता राशि को बढ़ाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के मानकों में सम्भव न होने पर अतिरिक्त राशि की व्यवस्था मुख्यमंत्री राहत कोष से की जाए। मुख्यमंत्री ने पुनर्निर्माण व राहत कार्यों की मॉनिटरिंग के लिये हाईपावर कमेटी बनाने के भी निर्देश दिये हैं।

आंगन व दीवार क्षतिग्रस्त को आंशिक क्षतिग्रस्त में किया गया शामिल

आंगन व दीवार क्षतिग्रस्त को आंशिक क्षतिग्रस्त में किया गया शामिल

मुख्यमंत्री के निर्देश पर निर्णय लिया गया कि प्रभावित परिवारों को कपड़े, बर्तन व घरेलू सामान के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 3800 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया है। पूर्ण क्षतिग्रस्त मकान के लिये सहायता राशि जो कि मैदानी क्षेत्रों में 95 हजार रुपये प्रति भवन और पहाड़ी क्षेत्रों में 1लाख 1 हजार 900 रुपये प्रति भवन दी जा रही है, को मैदानी और पर्वतीय दोनों क्षेत्रों में बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार रुपये प्रति भवन किया गया है। आंशिक क्षतिग्रस्त (पक्का) भवन के लिए सहायता राशि को 5200 रुपये प्रति भवन से बढ़ाकर 7500 रुपये प्रति भवन और आंशिक क्षतिग्रस्त (कच्चा) भवन के लिए सहायता राशि को 3200 रुपये प्रति भवन से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति भवन किया गया है। भूमि क्षति के लिए राहत राशि न्यूनतम एक हजार रुपये की जाएगी। अर्थात भूमि क्षति पर राहत राशि, कम से कम एक हजार रुपये तो दी ही जाएगी। घर के आगे या पीछे का आंगन व दीवार क्षतिग्रस्त होने को भी आंशिक क्षतिग्रस्त में लिया जाएगा। पहले इस पर सहायता नहीं दी जाती थी। जिन आवासीय कालोनियों में बिजली के बिल बाहर लगे थे, 18 व 19 अक्टूबर को आयी प्राकृतिक आपदा में खराब हो गये हैं, ऊर्जा विभाग इन खराब बिजली के मीटरों को निशुल्क बदलेगा। राज्य आपदा मोचन निधि मानकों से की गयी अधिक धनराशि का भुगतान मुख्यमंत्री राहत कोष से वहन किया जाएगा। इसी प्रकार क्षतिग्रस्त भवनों के प्रकरणों में यदि भवन एसडीआरएफ के मानकों की परिधि से बाहर है तो ऐसे प्रकरणों पर सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रदान की जाएगी। जीएसटी के दायरे से बाहर के छोटे व्यापारियों को दुकान में पानी भर जाने आदि से नुकसान होने पर 5 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। एसडीआरएफ के मानकों में कवर न होने पर की सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रदान की जाएगी।

चुनावी साल में पुरजोर विरोध का कांग्रेस का प्लान

चुनावी साल में पुरजोर विरोध का कांग्रेस का प्लान

सोमवार को ही कांग्रेस ने राज्य सरकार को आपदा प्रबंधन में फेल बताया था। पूर्व सीएम हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने 3 दिनों तक आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया। जिसके बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। ​28 अक्टूबर को कांग्रेस प्रदेशभर में उपवास भी करने जा रही है। कांग्रेस ने सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम देकर आपदा राहत कार्यों में तेजी लाने को कहा है। जिसके बाद कांग्रेस बड़े स्तर पर आंदोलन चलाएगी। पूर्व सीएम हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि इतने दिन बीत जाने के बावजूद भी पीड़ितों को मुआवजे की राशि नहीं दी गई है। हरीश रावत ने सवाल किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा था कि उत्तराखंड में आपदा के हालातों को लेकर 36 घंटे पहले जानकारी दे दी गई थी। लेकिन फिर भी प्रदेश सरकार क्यों सोई रही। कांग्रेस की रणनीति आपदा में राहत कार्य को लेकर सरकार को घेरने की है। जिसको चुनावी साल में जोर-शोर से उठाया जा सके। ​हालांकि पुष्कर​ सिंह धामी के आपदा के मानकों में बदलाव से विपक्ष को रणनीति में बदलाव करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

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