Uttarakhand: गुड्डी बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा, 40 साल में बच्चों के साथ दे रहीं 10वीं की परीक्षा
चमोली की 40 वर्षीय गुड्डी देवी ने पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पढ़ाई छोड़ी लेकिन अब वे अपने बच्चों और पति की प्रेरणा से ही हाईस्कूल की परीक्षा दे रही हैं।

चमोली की 40 वर्षीय गुड्डी देवी ने होंसला दिखाते हुए समाज को आईना दिखाने का काम किया है। गुड्डी देवी ने पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पढ़ाई छोड़ी लेकिन अब वे अपने बच्चों और पति की प्रेरणा से ही हाईस्कूल की परीक्षा दे रही हैं।
आठवीं की परीक्षा वर्ष 1996 में पास की थी
पहाड़ की महिलाओं की जिदंगी पहाड़ की तरह कठिनाई से भरे होते हैं। इसके साथ ही महिलाओं को अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते कई बार अपने सपने और इच्छाओं को मारना पड़ता है। लेकिन कुछ महिलाएं अपनी दृढ़ इच्छा को पूरा करने के लिए प्रयासरत रहती हैं और समाज के लिए प्रेरणा बनती हैं। ऐसा ही कुछ करके दिखा रही हैं चमोली की भेटी गांव निवासी गुड्डी देवी। जो अपने बच्चों के साथ बोर्ड परीक्षा दे रही हैं। गुड्डी ने थराली ब्लॉक के रतगांव से आठवीं की परीक्षा वर्ष 1996 में पास की थी। बाद में शादी हो गई और पारिवारिक कारणों से पढ़ाई नहीं कर पाई। लेकिन बच्चों ने जब मां के अंदर पढ़ने की इच्छा देखी तो मां का सपना पूरा करने के लिए खुद भी मां को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और परीक्षा देने के लिए तैयार किया।
बड़ा बेटा इंटरमीडिएट और छोटा बेटा दसवीं की परीक्षा दे रहा
इस साल गुड्डी उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा दे रही हैं। गुड्डी देवी मिनी आंगनबाड़ी भेंटी में भी काम कर रही है। परिवार में पति शिवपाल और दो बेटे हैं अंशुल और अंकुश। बड़ा बेटा अंशुल (18 साल) इंटरमीडिएट और छोटा बेटा अंकुश (17 साल) दसवीं की परीक्षा दे रहा है। भेंटी गांव से जीआईसी बांजबगड़ करीब पांच किमी दूर है। दोनों बच्चे यहीं पढ़ने आते हैं। परीक्षा केंद्र भी इसी विद्यालय में बनाया गया है। अब मां अपने दोनों बेटों के साथ परीक्षा देने आते हैं। इसको लेकर शिक्षा विभाग भी काफी खुश है और मां और बच्चों की इस प्रेरणा को समाज के लिए आईना बता रहे हैं।












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