Chaitra Navratri 2023: चूड़ामणि देवी मंदिर, अनूठी मान्यता चोरी करने से होती है मन्नतें पूरी
सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी का मंदिर रुड़की से 19 किलोमीटर दूर भगवानपुर के चुडिय़ाला गांव में स्थित है। मान्यता है कि यहां अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए चोरी करनी पड़ती है।

नवरात्रि में हर कोई भक्त माता के दर्शन कर अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। जिसके लिए भक्त सिद्धपीठ में दर्शन करने जा रहे हैं। हर मंदिर की अपनी पौराणिक कथा और मान्यताएं है। ऐसी ही अनूठी मान्यताओं के लिए जाना जाता है सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी का मंदिर। ये मंदिर रुड़की से 19 किलोमीटर दूर भगवानपुर के चुडिय़ाला गांव में स्थित है।
51 शक्तिपीठों में शामिल
मान्यता है कि यहां अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए चोरी करनी पड़ती है। यह मंदिर पुत्र प्राप्ती की मनोकामना पूरी करने के लिए जाना जाता है जो कि 51 शक्तिपीठों में शामिल है। मान्यताओं के अनुसार जो लोगों को पुत्र की चाह होती है वो जोड़े यहां आकर माता के चरणों से लोकड़ा (लकड़ी का गुड्डा) चोरी करके अपने साथ ले जाएं। तो बेटा होता है। मन्नत पूरी होने पर अपने संतान के साथ लोग यहां आते हैं और अन्य लोकड़ा भी अपने पुत्र के हाथों देवी के चरणों में चढ़वाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार मंदिर का निर्माण 1805 में लंढौरा रियासत के राजा ने करवाया था। एक बार राजा शिकार करने जंगल में आए हुए थे। तभी उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। राजा का कोई पुत्र नहीं था। इसलिए राजा ने माता से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी। इसके बाद राजा को पुत्र हुआ और इच्छा पूरी होने पर उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया। मान्यता है कि यहां पर देवी का चूड़ा गिरा था। इसी वजह से यह मंदिर चूड़ामणि देवी के नाम से प्रसिद्ध है।रोज लगता है मां का बिस्तर, होता है ये चमत्कार
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