पूर्व विधायक के बयान से उड़ सकती है भाजपा की नींद, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप, 10 करोड़ में डील करने का है दावा
पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण के बयान से उड़ सकती है भाजपा की नींद, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप, 10 करोड़ में डील करने का है दावा
देहरादून, 13 नवंबर। उत्तराखंड में चुनाव से पहले दलबदल को लेकर आए दिन नए नामों को लेकर चर्चा तेज है। इस बीच गंगोत्री सीट से पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण के एक बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। विजयपाल सजवाण ने दलबदल को लेकर चल रहे उनके नामों की चर्चा पर विराम लगाते हुए दावा किया है कि वे 2016 के बगावत प्रकरण के दौरान भाजपा में नहीं गए तो अब क्या जाएंगे। उनका दावा है कि उन्हें 10 करोड़ और मंत्री पद का लालच दिया गया था। पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के काफी करीबी माने जाते हैं। ऐसे में चुनाव से पहले विजयपाल सजवाण ने विजय बहुगुणा की इमेज और उनके दावे भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। इससे भाजपा की मुसीबतें बढ़ना तय है।
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दलबदल के दावे के बीच बड़ा बयान
भाजपा और कांग्रेस उत्तराखंड में एक दूसरे दलों के बड़े चेहरों को अपने-अपने पाले में लाने के लिए सियासी दांव पेंच चल रही है। इसके लिए दलबदल और जोड़तोड़ की राजनीति भी जमकर हो रही है। भाजपा ने सबसे पहले शुरूआत की तो कांग्रेस ने भाजपा को बड़ा झटका दिया। भाजपा ने 3 विधायक प्रीतम पंवार, राजकुमार और राम सिंह कैड़ा को अपने पाले में लाए तो कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री रहे यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव आर्य को अपने पाले मे लाकर भाजपा को चुनौती दे डाली। इसके बाद भी कांग्रेस के कई पूर्व विधायकों के भाजपा में आने की चर्चाएं तेज हो गई। इनमें गंगोत्री के पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण का नाम प्रमुखता से लिया गया। विजयपाल सजवाण को लेकर इसलिए ज्यादा चर्चा थी, कि वे पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के सबसे करीबी विधायकों में से एक थे। जब कांग्रेस में बगावत हुई तो विजय बहुगुणा अपने समर्थक विधायकों को भाजपा में ले आए लेकिन विजयपाल ने कांग्रेस नहीं छोड़ी। हालांकि 2017 में विजयपाल गंगोत्री सीट से चुनाव हार गए। भाजपा के दिवंगत विधायक गोपाल सिंह रावत ने चुनाव जीता। इस बीच गोपाल रावत का निधन हो गया तो विजयपाल सजवाण को लेकर कयास लगाए गए कि वे भाजपा में आ सकते हैं। लेकिन विजयपाल सजवाण ने एक कार्यक्रम में बड़ा बयान देकर सियासी पारा चढ़ा दिया। इतना ही नहीं विजयपाल ने 2016 के बगावत प्रकरण को भी गर्मा दिया है। ऐसे में उस समय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए विधायकों को लेकर भी सवाल खड़े होने तय हैं।

विजय बहुगुणा की भी बढ़ सकती है मुश्किलें
पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने कहा कि जब 2016 में सरकार गिराई गई धन और ताकत के बल पर भाजपा की सरकार ने हमें 10-10 करोड़ रुपए का लालच दिया गया। उन्होंने कहा कि वे विजय बहुगुणा के करीबी रहे हैं। लेकिन वे पार्टी छोड़ने की कभी नहीं सोच सकते हैं। विजय पाल सजवाण के इस बयान के बाद कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने वाले विधायकों को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में बगावत प्रकरण एक बार फिर सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विजयपाल बहुगुणा के इस बयान के बाद विजय बहुगुणा की भी भाजपा में मुश्किलें बढ़ सकती है। विजय बहुगुणा ने 15 दिन में कांग्रेस के अंदर बड़े घटनाक्रम के संकेत दिए थे, लेकिन 15 दिन गुजर जाने के बाद भी कुछ घटनाक्रम न होने से विजय बहुगुणा की विश्वसनीयता और पार्टी में कद पर असर पड़ना तय है।

क्या था बगावत प्रकरण
वर्ष 2016 में कांग्रेस के नौ विधायकों ने हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत की। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में लौटी तो विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बन गए। लेकिन दो साल का कार्यकाल पूर्ण करने से पहले ही उनकी भी विदाई हो गई और हरीश रावत को सत्ता मिली। इसके बाद वर्ष 2016 के फरवरी में हरीश रावत ने बतौर मुख्यमंत्री दो साल पूरे किए और 18 मार्च को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नौ पार्टी विधायकों ने उनके खिलाफ बगावत कर दी। बाद में सभी विधायक भाजपा में चले गए। इनमें विजय बहुगुणा, डॉ. हरक सिंह रावत, अमृता रावत, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा, शैलारानी रावत, उमेश शर्मा काऊ, रेखा आर्य शामिल थे।












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