उत्तराखंड में भाजपा की धामी सरकार ने देवस्थानम बोर्ड को लेकर दिखाया '10 का दम', जानिए कैसे

सदन में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक पेश

देहरादून, 10 दिसंबर। उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सरकार की और से सदन में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक पटल में रख दिया गया है। धामी सरकार ने अपना वादा निभाते हुए तीर्थ पुरोहितों की मांग पर देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की दिशा में एक कदम और बढ़ा दिया है। खास बात ये है कि विधेयक 10 दिसंबर को पटल पर रखा गया है। एक साल पहले उत्तराखंड विधानसभा के 2020 शीतकालीन सत्र में 10 दिसंबर को चारधाम श्राइन बोर्ड विधेयक पास किया गया, जिसके बदरीनाथ के बीजेपी विधायक महेंद्र भट्ट के प्रस्ताव पर विधेयक का नाम बदलकर विधेयक को उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन विधेयक, 2019 कहा गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 30 नवंबर को बोर्ड को भंग करने का ऐलान किया था। ऐसे में 10​ दिन के भीतर ही सरकार ने अपने वादे के अनुरूप फैसला ले लिया है।

 BJPs Dhami government in Uttarakhand showed 10 power regarding Devasthanam board

सीएम के ऐलान के 10 दिन में विधेयक पेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट और उच्च स्तरीय कैबिनेट उपसमिति की रिपोर्ट को आधार बनाकर 30 ​नवंबर को देवस्थानम बोर्ड को भंग करने को लेकर बयान जारी किया है। देवस्थानम बोर्ड बनाने का फैसला भाजपा की ही सरकार के पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के शासनकाल में हुआ था। जो कि 10 दिसंबर 2020 को विधानसभा में पारित हुआ। त्रिवेंद्र सरकार का तर्क था ​कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम समेत 51 मंदिर बोर्ड के अधीन आने से यात्री सुविधाओं का नए तरीके से विकास किया जाएगा। इसके लिए तिरुपति बालाजी और बैष्णो देवी मंदिर श्राइन बोर्ड का भी हवाला दिया गया। कि जिस प्रकार इन मंदिरों में सरकार विकास कर रही है, वैसे ही उत्तराखंड में 51 मंदिरों में नया इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास का रोडमैप तैयार होगा। लेकिन तीर्थ पुरोहितों का कहना था कि इन मंदिरों और चारधामों के मंदिर की भौगोलिक परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। पहाड़ में इस तरह से अवस्थापना विकास नहीं हो सकता, जिस तरह दूसरे मंदिरों में हैं। जिसके बाद तीर्थ पुरोहितों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया। त्रिवेंद्र सिंह रावत की सीएम पद से छुट्टी होने के बाद नए सीएम तीरथ सिंह रावत ने भी जनभावनाओं के अनुरूप देवस्थानम बोर्ड निर्णय लेने की बात कही थी, लेकिन उनके समय कम होने के कारण उनके कार्यकाल में देवस्थानम बोर्ड पर सरकार आगे नहीं बढ़ पाई। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हाईपॉवर कमेटी की रिपोर्ट पेश करने के 5 ​दिन के भीतर ही बोर्ड को भंग करने का ऐलान कर दिया, और अब 10 दिन में सदन में एक्ट को खत्म करने का विधेयक भी ले आए। जिससे धामी सरकार ने चुनाव से पहले एक और नजीर पेश कर दी है।

केन्‍द्र की तर्ज पर बनाई रणनीति
प्रदेश की धामी सरकार ने देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए ठीक वैसी रणनीति पर फोकस किया जैसे मोदी सरकार ने कृषि कानून को वापस लेने में दिखाई। मोदी सरकार ने कृषि कानून को वापस लेने की प्रक्रिया भी 10 दिन के अंदर पूरी की। ​जो कि ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस कानून को वापस लेकर मोदी सरकार ने कई प्रदेशों में डेमेज कंट्रोल कर लिया। इसी तरह धामी सरकार ने देवस्थानम बोर्ड को भंग कर उत्तराखंड की 15 विधानसभा सीटों पर बन रहे समीकरणों को काफी हद तक अपने पक्ष मे करने की कोशिश शुरू कर दी है।

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