Uttarakhand: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना को लेकर आया बड़ा अपडेट, जानिए कब और कहां तक पहुंचेगी ट्रेन

उत्तराखंड के पहाड़ में ट्रेन पहुंचाने का सपना 2026 तक पूरा होगा। रेल विकास निगम लिमिटेड का दावा है कि 2026 तक ऋषिकेश से ब्यासी रेलवे स्टेशन तक ट्रेन पहुंच जाएगी। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्राडगेज रेल परियोजना में सुरंगों का निर्माण कार्य 60 फीसदी पूरा हो चुका है। अभी तक 127 किलोमीटर सुरंग बनकर तैयार हो गई है।

Big update regarding Rishikesh-Karnprayag project, know when and where the train will reach.

दावा है कि पांच महीने में अंदर स्टेशन बिल्डिंग और रेलवे ट्रैक निर्माण कार्य के टेंडर जारी होंगे। परियोजना में सुरंगों के अंदर और पुलों को ऊपर वैलास्टक ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। कई स्थानों पर फुटओवर ब्रिज और कई स्थानों रोड ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। सभी सुरंगों को वाटरप्रूफ बनाया गया है। पहले परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2024 रखा गया था। लेकिन कोविड के चलते परियोजना का लक्ष्य दो साल पीछे चले गया।

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के मध्य ट्रेनों का संचालन करने के लिए मुरादाबाद और ऋषिकेश में टनल कंट्रोल सेंटर बनाए जाएंगे। स्टेशनों पर भी टनल कंट्रोल सेंटर होंगे। आपातकालीन स्थिति के लिए कुछ स्टेशनों पर डीजल इंजन रखे जाएंगे। ट्रेनों के इंजन फेल होने की दशा में यह डीजल ट्रेन को खींचकर आगे स्टेशन तक ले जाएंगे।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी

  1. 126 किमी लंबी रेल परियोजना में 105 किलोमीटर लाइन सुरंगों के अंदर से ऋषिकेेश कर्णप्रयाग ब्राडगेज रेल परियोजना करीब 16.216 करोड़ की लागत से बन रही है।
  2. 126 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना में 105 किलोमीटर लाइन सुरंगों के अंदर से गुजरेगी। जबकि 21 किलोमीटर ट्रैक खुले आसमान के नीचे बनेगा।
  3. इस परियोजना निर्माण में 17 सुरंगों का निर्माण हो रहा है। 126 किलोमीटर की इस रेल परियोजना के 9 फेज में 80 प्रवेश द्वार होंगे।
  4. इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे हो जाएगा।
  5. इससे कर्णप्रयाग से बद्रीनाथ का 4.30 घंटे का सफर भी मात्र दोे घंटे में तय हो जाएगा। ऋषिकेश से बद्रीनाथ सिर्फ चार घंटे लगेंगे। इस यात्रा में पहले 11 घंटे लगते थे।
  6. उत्तराखंड में देश की सबसे लंबी 15 किलोमीटर की रेल सुरंग ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच बन रही हैं।
  7. इतिहास में वर्ष 1924 में अंग्रेजों द्वारा ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाइन का पहली बार सर्वे का विवरण है।
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