भ्रष्ट्राचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई, नौकरशाही में मचा हड़कंप

भ्रष्ट्राचार के आरोप के बाद दो आईएफएस निलंबित,एक अटैच

देहरादून, 28 अप्रैल। उत्तराखंड में धामी सरकार ने भ्रष्ट्राचार को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। जिससे एक बार फिर नौकरशाही में हड़कंप मचा हुआ है। भ्रष्ट्राचार के आरोप के बाद धामी सरकार ने दो आईएफएस को निलंबित कर दिया है। जबकि एक अधिकारी को अटैच किया है। हाल ही में वन मंत्री ने इस प्रकरण की फाइल चलाकर य​ह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार किसी भी तरह के भ्रष्ट्राचार को लेकर सख्त एक्शन लेगी। साथ ही भ्रष्ट्राचार को लेकर जीरो टालरेंस की नीति पर चल रही धामी सरकार ने वन विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई कर नौकरशाही को कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है।

Big action by the Dhami government on the policy of zero tolerance for corruption, there was a stir in the bureaucracy
दो आईएफएस निलंबित,एक मुख्यालय अटैच
उत्तराखंड की धामी सरकार ने वन विभाग में अवैध निर्माण समेत अनियमितताओं के मामले में तीन आईएफएस अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इनमे से सरकार ने दो आईएफएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया। जबकि, एक आईएफएस अधिकारी को देहरादून मुख्यालय अटैच किया गया है। उत्तराखंड वन विभाग में कॉर्बेट नेशनल पार्क के भीतर अवैध निर्माण समेत अनियमितताओं के मामले में कैंपा की जिम्मेदारी संभाल रहे जेएस सुहाग को जहां निलंबित किया गया है। वहीं, पिछले दिनों आय से अधिक संपत्ति मामले में चर्चाओं में रहने वाले किशनचंद को भी सस्पेंड किया गया है। सरकार ने कॉर्बेट नेशनल पार्क के निदेशक राहुल पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें देहरादून वन मुख्यालय में अटैच कर दिया है। बता दें कि, बीते दिनों पाखरौ रेंज में अवैध निर्माण और कटान मामले में पूर्व सरकार पर कई सवाल खड़े किए गए थे और इस मामले की जांच भी की जा रही थी। खास बात यह है कि अब इस मामले में गलत कार्यों की पुष्टि होने पर कार्रवाई की गई है।

यह है मामला
कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के अंतर्गत पाखरो में टाइगर सफारी के निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृति से अधिक पेड़ों का कटान कर दिया गया था। इसके अलावा इस क्षेत्र में सड़क, मोरघट्टी व पाखरो वन विश्राम गृह परिसर में भवन के अलावा जलाशय का निर्माण भी कराया गया। इन कार्यों के लिए कोई वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति तक नहीं ली गई थी। इस संबंध में मिली शिकायतों के बाद गत वर्ष जब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया, तब मामला प्रकाश में आया। एनटीसीए ने शिकायतों को सही पाते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की। इससे विभाग में हड़कंप मचा, लेकिन शुरुआत में केवल रेंज अधिकारी को हटाया गया। मामले ने तूल पकड़ा तो गत वर्ष 27 नवंबर को शासन ने तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग से यह जिम्मेदारी वापस ले ली थी। साथ ही कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के डीएफओ किशन चंद को विभाग प्रमुख कार्यालय से संबद्ध किया गया। इसके बाद वन मंत्री बनते ही सुबोध उनियाल ने ऐसे अधिकारियों की फाइल तलब की थी। जिसे बाद में कार्रवाई के लिए सीएम कार्यायल भेजा गया। जिस पर सीएम ने भी संस्तुति देते हुए कड़ा एक्शन लिया है।

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