भारत-चीन सीमा पर नीती घाटी की टिम्मरसैंण महादेव गुफा में बाबा बर्फानी, जानिए क्यों खास कैसे करें यात्रा
UTTARAKHAND NEWS उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित देश के प्रथम गांव नीती से डेढ़ किमी दूरी पर टिम्मरसैंण गुफा को बाबा बर्फानी गुफा के रुप में जाना जाता है। यहां बर्फ की शिलाओं ने शिवलिंग का आकार ले लिया है। बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इन दिनों यहां सिर्फ सेना व बीआरओ ही रहती है।
गुफा में पूजा का जिम्मा भी सेना के जवान ही संभालते हैं। नीती गांव के पास टिम्मरसैंण महादेव गुफा स्थित है। भारत-चीन सीमा पर स्थित नीती घाटी की टिम्मरसैंण गुफा में बाबा बर्फानी भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। सर्दियों में यहां पर प्राकृतिक रूप से बर्फ की शिला शिवलिंग का रूप ले लेती है।

श्रद्धालु यहां बाबा बर्फानी के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां पर स्थानीय ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। यहां दिसंबर से मार्च तक बाबा बर्फानी के दर्शन होते हैं। नीती घाटी में स्थित टिम्मरसैंण महादेव (बाबा बर्फानी) गुफा को पर्यटन विभाग पर्यटन के मानचित्र पर लाने में जुटा है।
इसके लिए 26.85 करोड़ रुपये की लागत से डेढ़ किलोमीटर ट्रेक, टिन शेड और पार्किंग का निर्माण कार्य किया जा रहा है। गुफा के आसपास सुंदरीकरण का कार्य भी चल रहा है। टिम्मरसैंण गुफा को पर्यटन के साथ तीर्थाटन सर्किट से जोड़ने की भी पहल की जा रही है।
इस गुफा में शीतकाल के दौरान बर्फ के पांच से सात शिवलिंग आकार लेते हैं। इसी अवधि में फरवरी से अप्रैल के बीच गुफा में बर्फ के पांच से सात शिवलिंग आकार लेते हैं, जिनके दर्शन को बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस गुफा में भगवान शिव ने ध्यान लगाया था।
गुफा में मौजूद शिवलिंग पर लगातार पानी की बूंदें टपकती रहती हैं, जो इसे और भी खास बनाती हैं। गुफा की लंबाई 50 मीटर के आसपास है। क्षेत्र के लोग पीढ़ियों से टिम्मरसैंण महादेव गुफा में दर्शन व पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। लेकिन, देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को भी यहां दर्शन के लिए सुविधाएं देने की तैयारी है।












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