चारधाम यात्रा शुरू होते ही धामी सरकार के इस फैसले का शुरू हुआ विरोध, जानिए क्यों नाराज हुए पंडा पुरोहित

चारधाम में दर्शन करने के लिए लिमिट तय करने का विरोध

देहरादून, 2 मई। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है। मां गंगा की उत्सव डोली गंगोत्री धाम के लिए रवाना हो चुकी है। मंगलवार से विधिवत चारधाम यात्रा शुरू होने जा रही है। 2 साल से कोविड प्रतिबंध के कारण स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और व्यापारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन इस बार जिस तरह का रिस्पांस तीर्थ यात्रियों का आ रहा है। उससे तीर्थ पुरोहित उत्साहित नजर आ रहे हैं। लेकिन राज्य सरकार के एक निर्देश से तीर्थ पुरोहित विरोध में उतर आए हैं। सरकार ने चारधाम में प्रतिदिन दर्शन करने के लिए यात्रियों की संख्या निर्धारित कर दी है। जिस पर पंडा समाज सरकार से विचार करने की मांग कर रहे हैं।

As soon as the Chardham Yatra started, the protest against this decision of the Dhami government started, know why Panda Purohit got angry

राज्य सरकार ने चारधाम आने वाले यात्रियों के लिए तीर्थस्थलों पर दर्शन करने को गाइडलाइन जारी की है। जिसके हिसाब से बदरीनाथ में 15 हजार, केदारनाथ धाम में 12 हजार, गंगोत्री में सात हजार, यमुनोत्री धाम में एक दिन में चार हजार श्रद्धालुओं को दर्शन कर सकेंगे। इस संबंध में शासन ने आदेश जारी किए हैं। यह व्यवस्था यात्रा सीजन के पहले 45 दिनों के लिए बनाई गई है। सरकार ने चारधामों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर परिसर की क्षमता और ठहरने की व्यवस्था के आधार पर दर्शन के लिए यात्रियों की अधिकतम संख्या तय की है। इसके साथ ही चारधाम यात्रा मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह चार बजे तक वाहनों का आवागमन प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा यात्रा पर आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए पर्यटन विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा। यात्रा के दौरान कोविड के अनुरूप व्यवहार का पालन करना होगा।
सरकार को पंडा पुरोहितों से करना चाहिए संवाद
राज्य सरकार ने अब तक पंडा पुरोहितों के हित में निर्णय लिया था। कोविड को देखते हुए भी सरकार ने किसी तरह की रिपोर्ट या टेस्ट को अनिवार्य नहीं किया है। जिससे पंडा पुरोहित काफी खुश नजर आ रहे थे। लेकिन अब सरकार ने प्रतिदिन दर्शन के लिए लिमिट तय कर दी, जिसके बाद अब राज्य सरकार का विरोध शुरु हो गया है। दो साल तक कोविड के चलते चारधाम यात्रा ठप रही। इस बार कोविड का असर कम है तो रिकॉर्ड श्रद्धालु दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। सरकार के नए निर्देश के बाद अब तीर्थ यात्री भी कन्फ्यूज हो सकते हैं। जिस तरह की प्लानिंग यात्रियों की ओर से कराई गई है। उसे अब बदलना पड़ सकता है। जिससे पंडा समाज नाराज हो रहे हैं। चारधाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत के अध्यक्ष कृष्ण कांत कोटियाल का कहना है कि इस बार यात्रा से स्थानीय लोगों को काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यात्रा मार्गों पर व्यवस्थाओं को दुरस्त करना चाहिए। न कि बेवजह के नियम कानून थोपने चाहिए। कोटियाल ने कहा कि सरकार जब भी चारधामों के संबंध में कोई फैसला ले तो तीर्थ पुरोहितों को उसमें जरुर शामिल करना चाहिए। इससे ​संवाद भी बना रहेगा और किसी तरह का विरोध भी नहीं होगा। कोटियाल का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर उन्हें भरोसा है लेकिन उनके सलाहकार उन्हें गलत सलाह दे रहे हैं। जिससे विरोध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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