उत्तराखंड में मिली एक और अद्भुत आठ मंजिला गुफा, चट्टान से शिवलिंग पर टपक रहा पानी
गुफा ऐतिहासिक महाकाली मंदिर से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर
देहरादून, 8 अप्रैल। उत्तराखंड के गंगोलीहाट में गंगावली क्षेत्र में आठ मंजिला गुफा मिली है। यह गुफा ऐतिहासिक महाकाली मंदिर से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। गंगोलीहाट क्षेत्र में स्थित लगभग एक दर्जन गुफाओं में यह अब तक की सबसे बड़ी गुफा बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने इसे महाकालेश्वर नाम दिया है।

चट्टानों पर पौराणिक आकृतियां उभरी
गंगोलीहाट निवासी दीपक और ऋषभ रावल एक साल पहले लॉकडाउन के दौरान अपने कुछ साथियों के साथ जंगल घूमने आए थे। तब वे इस गुफा के मुहाने पर पहुंचे थे, लेकिन गुफा के भीतर नहीं जा सके। बीते दिनों उन्होंने अपने दोस्तों को पूरा प्रकरण बताया और फिर से इस जगह पर पहुंच गए। जिसके बाद इस 8 मंजिला गुफा तक पहुंचे। गुफा खोजने वाले युवाओं ने बताया है कि भीतर का तापमान काफी कम है। गुफा की दीवारों से टपकने वाला पानी काफी ठंडा है। क्षेत्र की अन्य गुफाओं की तरह यहां भी चट्टानों पर पौराणिक आकृतियां उभरी हैं। शिवलिंग की आकृति पर चट्टान से पानी टपक रहा है। इसके अलावा शेषनाग व अन्य पौराणिक देवी, देवताओं के चित्र भी उभरे हैं। गुफाओं की घाटी के नाम से विख्यात गंगोलीहाट क्षेत्र की गुफाओं का स्कंद पुराण में भी उल्लेख है। गंगोलीहाट के सुतारगांव के डानाकोट में इससे पूर्व सबसे बड़ी सात मंजिला गुफा वर्ष 2014 में मिली थी। पिछले साल फरवरी में लाली गांव में 100 मीटर लंबी गुफा मिली थी। इस गुफा का नाम लटेश्वर गुफा रखा गया है।
मानस खंड में 21 गुफाओं का जिक्र
गंगावली क्षेत्र के शैल पर्वत शिखर पर मानस खंड में 21 गुफाओं का जिक्र है। जिसमें दस गुफाओं का पता चल चुका है। सिद्धपीठ हाट कालिका मंदिर के आसपास रविवार को मिली गुफा के अलावा तीन अन्य गुफाएं होने के संकेत भी मिल चुके हैं। अब तक पाताल भुवनेश्वर, कोटेश्वर, भोलेश्वर, महेश्वर, लाटेश्वर, मुक्तेश्वर, सप्तेश्वर, डाणेश्वर, सप्तेश्वर, भुगतुंग गुफाएं अस्तित्व में आ चुकी हैं।












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